श्रीराम इंजिनियरिंग काॅलेज में वेबिनार आयोजित

शि.वा.ब्यूरो, मुज़फ्फरनगर। आज श्रीराम ग्रुप ऑफ़ काॅलेजेज की ईकाई श्रीराम इंजिनियरिंग काॅलेज द्वारा एक वेबिनार का आयोजन किया गया, यह वेबिनार आईआईसी अर्थात नवाचार संस्थान परिषद द्वारा संचालित कुछ अधिवेशनाओं में से एक था। वेबिनार के दौरान एक पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया, जिसमें डाॅ आदित्य गौतम निदेशक श्रीराम काॅलेज, डाॅ गिरेन्द्र गौतम निदेशक श्रीराम काॅलेज ऑफ़ फार्मेसी, पवन कुमार गोयल विभागाध्यक्ष कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, अर्जुन कुमार सिंह विभागाध्यक्ष सिविल इंजीनियरिंग मुख्य वक्ता रहे।


पैनल डिस्कशन का प्रारम्भ डाॅ0 आदित्य गौतम द्वारा किया गया, जिसमें उन्होने बताया कि मार्च मेें जैसे लाॅकडाउन लगाया गया, जिसके कारण देश में सभी कार्य बंद रहे। इसकी वजह से मजदूरों को समय पर वेतन प्राप्त नहीं हुआ और सामान्य जनता को भी अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिसके चलते हमारे देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पडा। इसी क्रम में उन्होने कोविड-19 द्वारा उत्पन्न समस्याओं का भी वर्णन करते हुए बताया कि अनुभवी लोगों ने किस प्रकार नए रोजगार के साधन उत्पन्न कराए। डाॅ गिरेन्द्र गौतम ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज योजना की घोषणा की है, जो देश की सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 10 प्रतिशत है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत सूक्ष्म, लघु एवं माध्यम उद्योगों के कल्याण के लिए कुल 16 घोषणाए की गई। गरीबों, श्रमिकों और किसानों के लिए अनेक घोषणाएं की गई, जिसमें किसानों की आय दोगुनी हो सकती है तथा पैकेज का बहुत बड़ा हिस्सा ऋण के रूप में देने की योजना है। सरकार बैंको को ऋण वापसी की गारंटी देगी। कुछ क्षेत्रों मे ब्याज दर में 2 प्रतिशत का भार स्वंय वहन करेगी।


पवन कुमार गोयलने प्रस्तुतिकरण के द्वारा आत्मनिर्भर भारत के पांच प्रमुख स्तम्भों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत योजना का उद्देश्य अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र को मांग और आपूर्ति से पुनर्जिवित करना है। अर्जुन कुमार सिंह ने स्थानीय उत्पादो की महत्ता के बारे में  बताते हुए कहा कि हमारे देश में बहुत सा सामान बाहर से निर्यात किया जाता है। जब तक उनका कोई विकल्प सामने नहीं आता, तब तक सरकार भी निर्यात से मना नहीं कर सकती। उन्होने बताया यह जरूरी नहीं कि जो वस्तु स्थानीय स्तर पर बनायी जाती है वो एक ब्रांड नहीं हो सकती। हमें उसे ब्रांड बनाना पडे़गा। हम सब लोग अपनी दिनचर्या में जो वस्तुए इस्तेमाल करते है धीरे-धीरे उन्हे स्थानीय उत्पादो से बदला जा सकता है। हमें अपने स्थानीय उत्पाद को, यदि वो अच्छा है तो, उसका इतना प्रचार करना चाहिए कि वह उत्पाद देश-विदेशों में बिकने लगे।

बता दें कि नवाचार संस्थान परिषद शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित एक संस्थान है, जो अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद एवं एमआईसी (मैम्बर ऑफ़ इन्नोवेशन काउंसिल, उ0प्र0) संस्कृति को बढ़ावा दे रही है और आईआईसी का एक प्रतिष्ठित हिस्सा है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को नवोमेष और उद्यमिता का माहौल मुहैया कराना जाता है तथा इसी के साथ यहां उन्हें पेटेंट करने की शिक्षा भी दी जाती है।
कार्यक्रम में दिवेश मलिक, कनु प्रिया, पारूल जैन, विवेक अहलावत, फिरोज अली, पियुष चैहान का विशेष योगदान रहा।

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