खुश रहें, खुशियाँ बाँटे

कुँवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

मानव जीवन की यह विडंम्बना है कि अधिकांश लोग स्वास्थ की नहीं, बल्कि समृद्धि पर अधिक ध्यान देते हैं। शरीर की जरूरतों की अनदेखी करके अपनी भौतिक सुखों को जुटाने में व्यस्त रहते हैं और जब कमजोर वृद्ध शरीर पर रोग लगने शुरु होते हैं तो किसी भी कीमत पर स्वस्थ होने को बेचैन हो जाते हैं। अच्छी सेहत, सफल जीवन का मूलभूत आधार है। कई बार सेहत हमारे पास दिल, दिमाग़ और आत्मा के सुकून के रास्ते आती है। अच्छी सेहत का कोई एक ही तरीका नहीं है। हमेशा दवाओं से आराम मिले, यह भी जरूरी नहीं है। दूसरों के आत्मीयता भरे प्यार दुआओं से भी व्यक्ति स्वस्थ हो जाता है।
     महान दार्शनिक लाओत्से ने कहा है कि तुम्हारे पास जो है उसी से संतुष्ट रहो। चीजें, हालात जैसे हैं, उसी में अपना आनन्द खोजो। जब तुम्हें महसूस होने लगे कि किसी चीज़ का अभाव नहीं है, तब तुम्हें सारा संसार अपना सा लगने लगेगा। अधिकतर लोग अक्सर तनाव, बेचैनी और अपने जीवन के असुंतलन में इस तरह फँस जाते हैं कि किसी उद्देश्य, साथर्कता और खुशी का अनुभव ही खत्म हो जाता है। अपनी जरूरतों को न्यूनतम करना सबसे बड़ी चुनौती है। चीजों को जमा करने की बजाय  खुशनुमा पलों को जमा करना आनन्द लेना अधिक उपयोगी है। जब हम अर्जन के साथ विसर्जन करते हैं,  तब हमारे साथ दूसरों की खुशियाँ भी जुड़ जाती हैं और हम अपने हिस्से में से दूसरों को देना भी सीख जाते हैं।
  अपनी खुशियों से दूसरों के जीवन में उजाला करने वालों के बारे में संत खलीफा जिब्रान कहते हैं कि जब मैं सोया हुआ था, तब सपना देखता था कि खुशी ही जिन्दगी है। जब जागा तो देखा कि सेवा ही जिन्दगी है। जब सेवा करने लगा तो पाया कि सेवा ही खुशी है। अमूल्य जीवन में धनोर्पार्जन भी जरूरी है, लेकिन अत्याधिक धन लोभी बनना उचित नहीं है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष जय शिवा पटेल संघ

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