मतदान

मनमोहन शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

स्वार्थी, लालची, क्रोधी
या जो हो बेईमान
भूल कर भी उसको
न करना तुम मतदान
रिश्तों का दे वास्ता
रखता हो अल्प ज्ञान
पूतना के उस दूत में
समझो नहीं कोई जान
कुकरमुत्ता सा उग आए
जरा सी कड़कड़ाहट में
कसमें वादे खूब करे
कुर्सी की हड़बड़ाहट में
पढ़ इतिहास
क्या किसमें है खास
ये समझ ले सब जनता
रोम एक दिन में नहीं बनता
ये लिपे पुते चेहरे
न कभी होंगे तेरे
परछाई को पढ़
फिर आगे बढ़
अगर प्रगति का खुमार है
तो दे रूप मनचाहा
आज तु कुम्हार है
अब न बन अनजान
अपनी ताकत को पहचान
ये दान है तो दान कर
सीना अपना तानकर
पात्र को मतदान कर
कुपात्र को मत दान कर
कुसुम्पटी शिमला-9, हिमाचल प्रदेश

Related posts

Leave a Comment