सच्चे महान कर्मयोगी सरदार साहब

कुँवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

जब-जब इस पावनधरा पर सच्चे महान संत, कर्मयोगी पुरुषों, जैसे भगवान बुद्ध, महावीर, शूरवीर शिवाजी महाराज और सरदार पटेल साहब जैसे दृढ़ निश्चयी और बलिदानी युग पुरुषों ने जन्म लिया है, तब-तब इस धरा से जुल्म, शोषण और अंधकार का अंत हुआ है।  संसार से दुःखों, पापों और पापियों से मुक्ति के लिए ही तो ईशःवरीय शक्तियाँ भी अवतरित होती रही हैं। सरदार साहब जन्म से ही जुझारू, दृढ़ निश्चयी थे। वो जिस कार्य का लक्ष्य निर्धारित करते, उसे पूरा करके ही दम लेते थे। ऐसे उनके अनगिनत सफल उदाहरण हैं, जब उन्होंने असम्भव को सम्भव कर दिखाया।
     वर्ष 1917 लगभग की बात है। सरदार पटेल साहब अहमदाबाद नगर पालिका के अध्यक्ष चुने गये। उनके कार्यकाल में भीषण महामारी फैल गई। हिमालय जैसे ऊँचे और अटल इरादों के साथ सरदार साहब रात दिन लोगों की सेवा में लगे रहते। वह स्वय सफाई से लेकर दवा और सेवा कर लोगों को महामारी से बचाने के मानव सेवा धर्म के पुरोधा बनकर अस़ख्य लोगों की जानबचाई। सरदार साहब के तमाम शुभचिन्तक उनसे खुद के गिरते स्वास्थ को लेकर सजग रहने का आग्रह करते, लेकिन वह एक मिशन को पूरा किये बग़ैर कैसे रुकते? हालांकि डा.राजेन्द्र प्रसाद पटना नगरपालिका अध्यक्ष और नेहरू इलाहाबाद पालिका अध्यक्ष भी क्रमशः बनें, लेकिन दोनों ने ही कुछ दिनों में ही अपने-अपने पदों से यह कहकर इस्तीफा दे दिया कि यह तो बहुत कठिन काम है। हमेशा ही जनाकांक्षा के पैमाने पर खरे उतरने वाले सरदार साहब को सर्वसम्मत्ति से प्रधानमंत्री चुने जाने के बावजूद गाँधी ने उनसे प्रधानमंत्री की कुर्सी छीनकर नेहरू को सौंप दी और सरदार साहब ने यहाँ भी बुद्ध भगवान की तरह राजपाट त्यागकर जनसेवा, राष्ट्र सेवा के लिये भगवान शिव की तरह कडुआ घूँट पीकर अमर हो गये। आज हम सभी सरदार साहब के अनुयायी यह निश्चय करते हैं कि हमसब उनके पद चिह्नों पर चलकर एक उन्नत, मजबूत समाज और राष्ट्र का निर्माण करेंगे।
राष्ट्रीय अध्यक्ष जय शिवा पटेल संघ

Related posts

Leave a Comment