सैंटाक्लास से मिली भाटिया की विश, बच्चे से ईश्वर कभी नहीं छीने उसके पेरेंट्स

डॉक्टर मिली भाटिया आर्टिस्ट, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

शिक्षा वाहिनी के माध्यम से सैंटाक्लास से क्रिसमस पर यह विश माँगना चाहूँगी कि कभी भी एक बच्चे से ईश्वर उसके पेरेंट्स को नहीं छीने। गिफ़्ट्स, चाकलेट हर चीज़ से बढ़कर होते हैं, मम्मी-पापा। मम्मी-पापा की जगह तो खुद ईश्वर भी नहीं ले सकते। सैंटा तो बच्चों के पेरेंट्स ही होते हें। 17 साल पहले में जब 17 साल की थीं, तब मम्मी को खो दिया था। ईश्वर से एक साल तक नाराज़ भी रही। गणपति जी को बहुत मानती थी पहले, पर ये ईश्वर का इंसाफ़ नहीं कि एक बच्चे से उसकी मम्मी को छीन ले। मम्मी-पापा एक दिन ही नहीं अपनी पूरी ज़िंदगी बच्चों के लिए सैंटाक्लास होते हैं, जो बिना माँगे अपने बच्चों की सारी विश पूरी करते हैं। उन्हें सारी ख़ुशियाँ देते हें, उसके लिए उन्हें चाहे कितनी भी परेशानियाँ उठानी पड़ें। मैं भी अपने सैंटाक्लास मेरी मम्मी (जो ईश्वर के घर हें,पर उनका आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ है) और मेरे पापा को जो मेरी हर मुश्किल में साथ हैं। वो मेरी हिम्मत हैं। उन्हें मेरी क्रिसमस विश करती हूँ। सैंटाक्लास से विश करती हूँ कि हर जन्म में मुझे ये ही मम्मी-पापा मिले और मेरा बचपन-टीनेज बिना मम्मी के नहीं बीते, इस जन्म की तरह।
रावतभाटा, राजस्थान

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