राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना महिला इकाई की योग पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. निशा जोशी ने कहा-प्राण का आयाम ही प्राणायाम

डॉ. शम्भू पंवार, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में मनुष्य को अपनी दिनचर्या व्यवस्थित करने के लिए गुरूकुल की शिक्षा एवं संस्कारों के साथ जीवन का संचालन करना चाहिये।
उक्त विचार राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना की महिला इकाई द्वारा योग- ‘प्राणायाम एवं हमारा जीवन‘ पर आयोजित राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी में  मुख्य वक्ता डॉ. निशा जोशी ने कहे।उन्होंने कहा कि नाड़ी शोधन प्राणायाम से ऑक्सीजन शुद्ध मिलता है। योग कोरोना में भी सफल है। प्राणायाम चमत्कारी है। प्राण का आयाम करना ही प्राणायाम है। प्राणायाम हमारे प्राण की उर्जा बढ़ाता है। श्वास का नियंत्रण करने से उम्र भी बढ़ती है। सांस लम्बी एवं गहरी लेना ही प्राणायाम कहलाता है।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ. शम्भू पंवार ने कहा वर्तमान समय में योग का हमारे जीवन में बड़ा विशेष महत्व है । आज के दूषित वातावरण व प्रदूषित पर्यावरण के साथ-साथ बदलते सामाजिक परिवेश में फास्ट फूड, पैकेजिंग भोज्य पदार्थों के प्रति युवा पीढ़ी के बढ़ते आकर्षण से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव होना लाजमी है और हम शारीरिक रूप से रोगों को उत्पन्न करने में सहायक बन जाते हैं । इसलिए स्वास्थ्य तन और मन के लिए हमें हमारे जीवन में योग और प्राणायाम को अपनाना चाहिए स्वस्थ तन से ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है।  विशेष अतिथि डॉ मुक्ता कौशिक ने कहा योग एवं प्राणायाम एक अध्यात्मिक प्रक्रिया है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने काम योग का होता है।जो हमारे मन, आत्मा,और शरीर को ताकत पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि योग सही तरीके से जीने का विज्ञान है ‌और इसलिए इसको दैनिक जीवन में शामिल किया जाना चाहिए। गरिमा गर्ग ने अपनी कविता के माध्यम से योग पर बहुत सुंदर संदेश दिया। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सुवर्णा जाधव ने कहा वर्तमान समय मे योग की महती आवश्यकता है।  संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रही संचेतना की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. उर्वशी उपाध्याय ने कहा कि जीवन को जीने का सही तरीका ही योग है। हमें स्वस्थ रहने एवं अनुशासन के लिये योग आवश्यक है।
इससे पूर्व संगोष्ठी का शुभारम्भ ज्योति तिवारी की सरस्वती वंदना से हुवा एवं स्वागत भाषण संचेतना की राजस्थान प्रदेश महासचिव प्रसिद्ध साहित्यकार, लेखक डॉ. रेनू ‘शब्द मुखर‘(जयपुर) ने दिया। अतिथि परिचय राकेश छोकर राष्ट्रीय  कार्यकारी अध्यक्ष ने एवं विषय प्रस्तावना डॉ. प्रभु चौधरी राष्ट्रीय महासचिव ने प्रस्तुत की। राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के महिला इकाई बैठक के द्वितीय सत्र में राष्ट्रीय महासचिव डॉ. प्रभु चौधरी ने बताया आगामी अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन प्रति वर्षानुसार इस जयपुर ,राजस्थान में प्रस्तावित है। सभी पदाधिकारियों से आग्रह है , मातृशक्ति सम्मान समारोह की तैयारियों में लग जाये। संगोष्ठी में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. शहाबुद्दीन शेख,  दीपिका सुतोड़िया,अनिल ओझा, डॉ. संगीता पाल, श्रीमती अनुराधा अच्छवान, श्रीमती दिव्या स्वर्णकार, डॉ. मुक्ता कौशिक, राकेश छोकर, पूर्णिमा कौशिक, डॉ. मंजू रूस्तोगी,  आदि उपस्थित थे। संगोष्ठी का शानदार संचालन महासचिव  डॉ. रश्मि चौबे ने किया।

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