स्वतंत्रता सैनानी

कल्पना गांगटा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

स्वतंत्रता सैनानी
कैसे थे, किस मिट्टी के थे वो फौलादी,
देश को गुलामी की जंजीरों से छुडा़ ,
जिन्होंने दिलाई हमको आजादी
उनको शत् शत् नमन्|
मातृभूमि की खातिर मिट जाना,
जिनका बस यही था नारा,
भाया कभी न जिनको पराधीन रहना,
दिखाया था सबको आजादी का सपना,
उनको शत् शत् नमन्|
कारतूस, बम गोलों को बनाया जिन्होंने खिलौना,
कांटों भरी राहों पर चलना, जमीन पर था जिनका बिछौना,
उनको शत् शत् नमन्|
गुलामी की जंजीरों से बेहतर,
जिनको लगा शहीद होना,
मातृभू के चरणों में शीश चढ़ाएंगे,
जिद्द ऐसी कर जिन्होंने छोडे़ आशियाने,
उनको शत् शत् नमन|
फिरंगियों का शासन जिन्हें न रास आया,
काला पानी की सज़ा को, जिन्होंने झेला,
छोड़ अपना चमन, कफ़न सिर पर सजाया,
देश के लिए हंसते हंसते झूल गए जो फांसी पर,
उनको शत्-शत् नमन
उनको शत्-शत् नमन्…………..
ढल्ली, शिमला हिमाचल प्रदेश 

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