डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
रिद्धि सिद्धि हैं बेटियां,
रहे साथ गणराय।
मनोकामना पूरे करें,
सबको करें सहाय।।१
दुर्गा सीय सावित्री
उमा शारदा माय।
अरुंधति अरु गार्गी
पन्ना जैसी धाय।।२
सब दुनिया में छा रहा
बेटी का परताप।
सीता में ही राम बसे
राधा बसते आप।।३
सीता ने पावन किये
जनक कौशलाधीस।
अनुसुइया ने बाल किये
तीन देव जगदीश।।४
रत्नावली तुलसी जगे
विद्योतम कालिदास।
रामचरितमानस लिखी,
शाकुंतल सा रास।।५
गुरु मतंग चेली भई,
शबरी बाको नाम।
बेर खबाये राम को
भक्ति करी निष्काम।।६
केकई थी वीरांगना
दशरथ दिये जिताय।
आप कलंक झेल करी
राम किया जगराय।।७
अंजना के लाल भये ,
पूत वीर हनुमान।
बल बुद्धि के कारणे
जानत सकल जहान।।८
उर्मिला को ध्यान धरो
बाकी शक्ति अपार।
लक्ष्मण जैसे वीर की
बनी वही हथियार।।९
बेटी शेष सुलोचना
सती का सत अपार।
मेघनाथ से वीर की
जीवन को सिंगार।।१०
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश