बेटी है अनमोल

नरेन्द्र कुमार शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

१) जब पूछे कोई कि बेटी क्या है?
मैं कहता हूं कि बेटी है तो संसार है।
बेटी एक नहीं दो- दो परिवारों का प्यार है।
बेटी से ही वंश और दाम्पत्य का दीदार है।
२) कभी जलाई जाती हैं बेटियां और मांगा जाता है दहेज़।
वो सास भी कभी बेटी थी आज इसका भी नहीं परहेज़।
कोई हमारी बेटी के साथ करे ऐसा, वो असहनीय व्यवहार है।
जब पूछे कोई कि बेटी क्या है, मैं कहता हूं कि बेटी है तो संसार है।
३) कभी तलाक, मार और कभी खाना भी कम।
वो बेटी ही है जो पत्नी के रूप में सह लेती है सारे गम।
समझें तो मां की ममता है बेटी, किसी देवी का आकर है।
जब पूछे कोई कि बेटी क्या है, मैं कहता हूं कि बेटी है तो संसार है।
४) बेटी कभी कोख़ तो कभी कचरे के डिब्बे में की जाती है समाप्त।
इसी करतूतों से लिंग अनुपात घटा, समाज को हो गई आफ़त।
सरस्वती, शैलपुत्री और लक्ष्मी का रूप है बेटी, गंदी सोच बेकार है।
जब पूछे कोई कि बेटी क्या है, मैं कहता हूं कि बेटी है तो संसार है।

शिमला, हिमाचल प्रदेश

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