फेसबुक लॉइव साहित्य कला संवाद (विस्तृत समीक्षा ), 200 एपीसोड फेसबुक पर लॉइव सफलता का प्रमाण

उमा ठाकुर शिमला, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

हिमाचल कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी द्वारा सोशल मीडिया का प्रयोग करते हुए गत 24 मई 2020 से फेसबुक पेज पर लाइव “साहित्य कला संवाद” कार्यक्रम शुरू किया गया था, जिसके तहत सभी कलाकारों व साहित्यकारों को समान रूप से अवसर प्रदान किया जा रहा है। अकादमी हर वर्ष बहुत से साहित्यक आयोजन करती आ रही है, परन्तु इस वर्ष कोरोना काल के चलते कार्यक्रम हिमाचल अकादमी के फ़ेसबुक पेज़ पर “साहित्य कला संवाद” के तहत हर रोज़ सांय 6.30 बजे प्रसारित किया जा रहा है, जिसकी सफलता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 12 दिसंबर 2020 तक अकादमी  को 200 एपीसोड फेसबुक पर लॉइव प्रसारित हो चुके हैं। इस कार्यक्रम में हिमाचल के साथ साथ देश-विदेश के युवा और वरिष्ठ साहित्यकार, कवि, लेखक, कलाकार जुड़े और आकादमी के प्रयासों में अपना बहुमूल्य योगदान दिया।

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 साहित्य  कला संवाद कार्यक्रम में जिन साहित्यकारों व कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी, उनमें वरिष्ठ साहित्यकार सुदर्शन वशिष्ठ, कहानीकार एसआर हरनोट, डॉ. कर्म सिंह, डॉ. इन्द्र सिहं ठाकुर, अखिलेश मिश्रा, मंत्री डॉ.रामलाल मारकंडे, डॉ. प्रत्युष गुलेरी, मदन हिमाचली, डॉ. गौतम शर्मा व्यथित, डॉ. सत्यनारायण स्नेही, वरिन्द्र शर्मा वीर, गज़लकार नवनीत शर्मा, रुपेशवरी शर्मा, रूही जूही जम्मू से, सस्कृत कवि कृष्ण मोहन पांडेय, चर्चित कवि आत्मा रंजन, अनन्त आलोक, कल्पना गागंटा, डॉ. प्रियंका वैध्, डॉ.अदिति गुलेरी, गंगा राम राजी, सरोज परमार, पोमिला सिहं, कृष्णा ठाकुर, लता शर्मा, डॉ. देव कन्या, गज़लकार सुमित राज वशिष्ठ, कुलदीप तरूण गर्ग, सुरेश शांडिल्य, नेम चंद अजनबी, बह्मा नन्द देवरानी, डॉ. बुलाकी शर्मा, नरेश दियोग, अनुराधा, डॉ. प्रेम लाल गौतम, दीप्ति सारस्वत, प्रोमिला भारद्वाज, कृष्णा ठाकुर, लता शर्मा, चंद्रकांता, साक्षी शर्मा, दक्षा उपाध्याय, दीपक शर्मा, राजेश सारस्वत, उमा ठाकुर नधैक आदि ने अपनी दमदार प्रस्तुति दी हैं। सभी ने इस कार्यक्रम को पसन्द किया और मुक्त कंठ से सराहना भी की।

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कुछ आलोचनाओं के चलते समय-समय पर आकादमी सचिव डॉ. कर्म सिहं ने दर्शकों की रूचि को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में कुछ बदलाव भी किए। बच्चों के लिए बालमंच, महिलाओं के लिए कवि सम्मेलन, वरिष्ठ साहित्यकार सम्मेलन, युवा कवि सम्मेलन, यानि हर वर्ग के लेखकों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम तैयार किए गए। इसके साथ ही पहाड़ी लोक संस्कृति व बोलियों को बढ़ावा देने के लिए विद्वानजनों के विचार इस पटल पर सुनने को मिले। इसके अलावा टांकरी लिपि प्रशिक्षण, पहाड़ी चित्र कला प्रशिक्षण आदि कार्यक्रम भी आकादमी द्वारा आनलाईन आयोजित किए जा रहे हैं।

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प्रतिक्रियाओं की अगर बात करें तो इस कार्यक्रम में हिमाचल अकादमी के फेस बुक पेज पर बहुत से साहित्य व कला प्रेमी हर रोज़ जुड़ते हैं, जो कार्यक्रम की सफलता दर्शानें के लिए काफी है, जिसके लिए हिमाचल आकादमी के सभी उच्च अधिकारी, सचिव डॉ कर्म सिंह, संयोजक हितेंन्द्र शर्मा व अकादमी की पूरी टीम बधाई के पात्र हैं साथ ही सभी साहित्यकार, कलाकार व तमाम दर्शक भी, जिन्होंने कार्यक्रम को इतने कम समय में सफलता के शिखर तक पहुंचाया और कला व साहित्य संरक्षण में अमूल्य योगदान दिया । भविष्य  में भी हिमाचल आकादमी द्वारा साहित्य, लोक संस्कृति व कला को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के  कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगें ऐसी कामना करती हूँ।

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