करसोग की प्राचीन व दुर्लभ तांत्रिक विधि है हांडी थाली

राज शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

“हांडी थाली”करसोग की प्राचीन व दुर्लभ तांत्रिक विधि मे कांसे की थाली पर नाचने पर विवश हो जाते है। देवता यूं तो हिमाचल के कई स्थानों पर यह परम्परा आज भी विद्यमान है, पर करसोग में इसकी विधि अत्यंत ही गोपनीय व् अदभुत है। मंडी जिला में पांगणा उप तहसील के अंतर्गत सोरता पँचायत में छोटा सा गांव बेगली के निवासी अमर चन्द एक जाने माने सिद्ध तांत्रिक है, इस प्राचीन परंपरा को बचाये हुए है। “हांड़ी थाली” की यह प्राचीन परंपरा पुरे क्षेत्र में मौजूद है, परंतु अमर चन्द ने इसमें महारत हासिल कर ली है। उनका कहना है कि इस दुर्लभ परम्परा को बचाना अति आवश्यक है। इस परम्परा के माध्यम से ही वे अतृप्त आत्माओ को मुक्ति दिलाते हैं और सुप्त या बन्धन में पड़े देवताओ को जागृत करते हैं। इस परंपरा को विस्तार से समझाते हुए वे कहते है कि एक पीतल की हांड़ी के ऊपर कांसे की थाली की स्थापना की जाती है और सिद्घ मंत्रो जिन्हें “भार” कहा जाता है, जो तीव्र स्वर में गाये जाते है जो देवताओ को प्रकट होने पर विवश कर देते है। आज यह परम्परा अति सूक्ष्म हो इसको सरक्षण की अति आवश्यकता है।
टीम देव समाज समिति करसोग हिमाचल प्रदेश

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