ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ क्रांतिकारी लोगों को नेता बनाना होगा

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कूर्मि कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

          सोशल मीडिया पर कूर्मि समाज या अन्य कोई भी समाज के जातीय या सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी के द्वारा एक-दूसरे को नीचा दिखाने या अपमानित करने के लिए अशोभनीय टिप्पणी करके खुद अपना और संगठन के गरिमा धूमिल करने करने के लिए जो भी प्रयास किये जा रहे हैं, इसकी सभी का घोर निंदा करनी चाहिए। मीडिया हम कूर्मि समेत अन्य पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के मूलनिवासी के पकड़ से बहुत दूर है।
हमारी समस्याओं, हमारी बातों को जनरल मीडिया में आज उठाने वाले पत्रकार न के बराबर है। ऐसी स्थिति में सोशल मीडिया ही एक मात्र चारा है, जिसके सहारे हम अपनी बात, समस्याओं को प्रशासन, जनप्रतिनिधी या सरकार तक पहुंचा सकते हैं। इसके सहारे हम हमारे कूर्मि समेत अन्य 85 % मूलनिवासी समाज को जागरूक करके हमारे उपर किये जा रहे पाखंड, आडम्बर, सामाजिक कुरूतियाँ, उत्पीड़न, शोषण, अत्याचार और विभिन्न अन्याय के प्रति सावधान और सतर्क कर सकते हैं, लेकिन हम लोग कर क्या रहे हैं? सोशल मीडिया को हमलोगों ने एक -दूसरे को गाली देने का माध्यम बना लिया है, जहाँ से हमारे ही समाज के लोग अपने ही समाज के लोगों को सार्वजनिक रूप से गालियाँ देते हैं, अपमानित करते हैं और उन्हें जलील करने की हरसंभव कोशिश करते हैं।
संगठनों के ज़िम्मेदारों को विरोध या समालोचना करने वालों का पक्ष जानना चाहिए, पर व्यवहारिक रूप से संगठनों के पदाधिकारी ऐसा नहीं कर पाते, जिसके परिणाम स्वरूप उन्हें विद्रोह का दंश झेलना पड़ता है, जो कई बार पतन का कारण बनता है। हमारे भारत देश में निंदा, विरोध या शिकायत को सदियों से ही प्राथमिकता दी जाती रही है। महान संत कबीर जी ने भी “निंदक नियरे राखिये” जैसे प्रेरणादायक दोहा लिखें हैं, जिनका संदेश आज भी प्रासंगिक हैं।
राज्य और देश चलाने के हमारे लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी विपक्ष को समान अधिकार और सुविधाएं संविधान के अनुसार दी गई है, जिसका सभी सत्ता पक्ष के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को पालन करना प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक है। अपने -अपने घरों में भी हमलोग अपने माता -पिता, पत्नी, व्यस्क बच्चों और परिजनों से प्रायः पारिवारिक विषय पर सलाह लेकर सर्वसम्मति बनाकर फैसला लेकर किसी काम को पूरा करते हैं, जिसके कारण हमें जल्दी सफलता मिल जाती है और परिवार के सभी सदस्य खुश रहते हैं। जब हमारे बच्चें व्यस्क हो जाते हैं तो हमलोग उनसे घर -परिवार और रिश्तेदार से संबंधित मामले पर विचार विमर्श करते हैं, उनकी सहमति, स्वीकृति लेते हैं, घर -परिवार चलाने, संचालन की जवाबदेही अपने व्यस्क बेटे, बहुएं या बेटियों को देते हैं। यही काम हमलोग सामाजिक, जातीय संगठनों या राजनैतिक दलों में अपने समाज के अन्य ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ साथियों के साथ नहीं कर पाते हैं, यहाँ हमारे वरिष्ठ पदाधिकारी गण, जनप्रतिनिधी, नेता, मंत्री कब्र में पैर लटकने, मरते दम तक पदों पर खुद कब्जा जमाकर रखना चाहते हैं। आखिर ऐसा क्यों?
आज कूर्मि समेत अन्य पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के हजारों संगठन काम कर रहे हैं, पर इसका कोई लाभ हमारे साथियों को नहीं मिल रहा है। उल्टा कूर्मि समेत अन्य पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के लोगों पर विभिन्न तरह के आपराधिक घटनाएं बढ़ती जा रही है। सरकार भी पीड़ित परिवार के साथ न्याय नहीं कर पाती है। ऐसे में लाखों केस की फाईल बिना न्याय के ही डिस्पोजल कर दिये जाते हैं और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और राजनैतिक दलों के नेता मौन धारण किये रहते हैं। क्या आप समाज और देश में क्रांतिकारी बदलाव लाना चाहते हैं? आईए और जोर से हुंकार भरिये। अपने बीच से ऐसे लोगों को तलाशिये जो मेहनती और ईमानदार हों क्योंकि ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ क्रांतिकारी लोगों को नेता बनाना होगा, तभी कुछ भला हो सकता है।
संस्थापक राष्ट्रीय समता महासंघ व राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा 

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