श्रीराम काॅलेज ऑफ इंजीनियरिंग के इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में How to prepare a research paper  विषय पर सेमिनार आयोजित

शि.वा.ब्यूरो, मुज़फ्फरनगर। श्रीराम ग्रुप ऑफ़ काॅलेजेज़ की इकाई श्रीराम काॅलेज ऑफ इंजीनियरिंग के इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा विद्यार्थियों को शोध पत्र को तैयार करने की जानकारी देने के लिए “How to prepare a research paper”  विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें विभाग के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर प्रतिभाग किया। सेमिनार में इलैक्ट्रिल इंजीनियरिंग के तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों ने विषय पर पाॅवर प्वाइंट प्रजेंटेशन प्रस्तुत कर शोधपत्र तैयार करने की तकनीकों की विस्तृत रूप से जानकारी दी। तृतीय वर्ष के छात्र शुमांशु ने प्रजेटेशन प्रस्तुत करते हुए बताया कि शोध मानव ज्ञान को दिशा प्रदान करता है तथा ज्ञान भण्डार को विकसित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शोध जहां एक ओर मानव ज्ञान को दिशा प्रदान करता है, वहीं व्यक्तियों की मूल प्रवृति जिज्ञासा को संतुष्ट भी करता है। शोध व्यवहारिक समस्याओं का समाधान करने के साथ-साथ पूर्वाग्रहों का निवारण और निदान करने में भी सहायक होता है।


तृतीय वर्ष की छात्रा साक्षी शर्मा ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि ज्ञान की किसी भी शाखा में नवीन तथ्यों की खोज के लिए सावधानीपूर्वक किए गए अन्वेषण या जांच पड़ताल को शोध कहा जाता है। शोध करने के लिए सबसे पहले किसी समस्या या प्रश्न की आवश्यकता होती है। हमारे सामने कोई समस्या या प्रश्न होता है जिसके समाधान के लिए ही शोध किया जाता है। शोध से नए-नए शैक्षिक अनुशासनों का उद्भव होता है जो अपने विषय क्षेत्र की विशेषज्ञता का प्रतिनिधित्व भी करते हैं।
इस अवसर पर श्रीराम ग्रुप ऑफ काॅलेज के चेयरमैन डा0 एससी कुलश्रेष्ठ ने कहा की इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा एवं व्यक्त्तिव विकसित करने का अवसर मिलता है। उन्होने इस अवसर पर विभाग के शिक्षकों को भी बधाई का पात्र बताया। साथ ही विद्यार्थियों को सेमीनार में सीखी गयी तकनीक को भविष्य में लागू करने के लिये भी प्रेरित किया। श्रीराम काॅलेज ऑफ इंजीनियरिंग के निदेशक डा0 आलोक गुप्ता ने विद्यार्थियों को जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षा पत्र लिखने की कोई सही शैली नहीं होती। अलग-अलग शैक्षिक क्षेत्रों में लेखन शैली और कागजात की प्रस्तुति काफी भिन्न होती है। फिर भी कुछ भाग अधिकांश कागजात के लिए सामान्य होते हैं, जिनमें पेपर का शीर्षक, सार, समस्या का परिचय और विवरण, अघ्ययन की सीमाएं, क्रियाविधि, साहित्य की समीक्षा एवं निश्कर्ष आदि बिंदुओं को विस्तृत रूप से शामिल किया जाता है।


सेमीनार के अंत में विभागाध्यक्ष ई0 रोहिताश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि रिसर्च इंजीनियरिंग का एक अभिन्न अंग है और छात्रों को रिसर्च पेपर जरूर तैयार करना चाहिए जिससे उन्हे विषय का पूर्ण रूप से ज्ञान हो सके। सेमिनार का संचालन इलैक्ट्रिकल विभाग के प्रवक्ता ई0 तुषार शर्मा एंव विवेक अहलावत ने संयुक्त रूप से किया। सेमिनार के विषय पर पाॅवर प्वाइंट प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों में अनिकेत, अर्जुन, आशीष, वंश और अभिषेक, आदि विद्यार्थी रहे। कार्यक्रम में डीन एकेडेमिक अफेयर डा0 साक्षी श्रीवास्तव सहित विभाग के प्रवक्ता अनिल शर्मा आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

Related posts

Leave a Comment