अगले जन्म मुझे बिटिया ही कीजो

उमा ठाकुर, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। 

वैश्विक संकट के इस दौर में बहुत से कोरोना योद्धा फ्रंट वारियर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अनलॉक के इस दौर में कोविड का खतरा अभी टला नहीं है, ऐसे में हम सभी को और ज्यादा सावधान और सतर्क रहने की ज़रूरत है। जब तक दवाई नहीं, तब तक कोई ढिलाई नहीं। कोविड-19 के इस दौर में कुछ खबरें सकून देती है, जब एक बेटी फ़र्ज की राह पर चलते-चलते अपनी निजी ज़िंदगी की खुशियां भी दरकिनार कर देती है और सामने नज़र आता है बस देश भक्ति का जज्बा।
ऐसी ही हिमाचल प्रदेश के शिमला की तहसील रोहड़ू स्थित गांव भमनोली निवासी बेटी अंजलि नामंटा वर्तमान में आईजीएमसी शिमला में गत छह वर्षों से अपनी सेवाएं दे रही हैं। अंजलि के चाचा-चाची दिनेश नामंटा व सुनिता नांमटा ने बताया कि माता-पिता ने बड़े चाव से पिछले साल ही अंजलि की शादी तय की थी। शादी मई 2020 के महीने में होना तय हुई थी, परंतु इस दौरान कोविड 19 पीक पर था और  अंजलि आईजीएमसी के कोरोना वार्ड और अन्य वार्ड में अपनी सेवाएं दे रही थी। ऐसे समय में हिमाचल की इस बेटी ने अपने फ़र्ज को सर्वोपरि रखा और शादी से ज्यादा ज़रुरी कोरोना से ग्रसित मरीजों  की सेवा को समझा।
अंजलि कहती है कि शादी तो बाद में भी हो जाएगी, अभी तो मुझे बस देश सेवा करनी है। अंजलि जैसी और भी बहुत सी बेटियाँ इस कोरोना काल में अपने-अपने क्षेत्र में सेवाएं दे रही है। उन तमाम बेटियों को सैल्यूट! बेटी अनमोल का नारा तभी सार्थक होगा, जब हम बेटियों के पखों को उड़ान देगें और हर बेटी बस यही कहे-अगले जन्म मुझे बिटिया ही कीजो, वही बाबुल का आँगन वही माँ की गोद दीजो।
आयुष साहित्य सदन पंथाघाटी शिमला हिमाचल प्रदेश

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