भूमि सुधार कार्यक्रम के अन्तर्गत अब तक हजारों हेक्टेयर भूमि का किया पट्टा आवंटित

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। प्रदेश सरकार भूमिहीन, आवासहीन, गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग के लोगों को ग्राम पंचायत की जमीन देकर उनका विकास करती है। भूमि जैसी दैव प्रदत्त आर्थिक सम्पदा का सम्यक लाभ समाज के सभी वर्गों को मिले, इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने व्यवहारिक, संतुलित एवं जनोपयोगी कदम उठाये हैं। भूमि सुधार कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रदेश सरकार ने पात्र गरीबों को भूमि का पट्टा देकर उन्हें भूमिधर बनाया है। प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग द्वारा प्रदेश में ग्राम समाज की कृषि योग्य भूमि पट्टे पर आवंटित करने के लिए संघ के सशस्त्र बल में सक्रिय सेवा में रहते हुए शहीद हुए ऐसे व्यक्तियों के परिवारीजन को प्रथम वरीयता में भूमि आवंटित की जाती है। उसी तरह सेना में रहते हुए पूर्णतया दिव्यांग होने वाले सैनिक को द्वितीय वरीयता में ग्राम पंचायत की भूमि का पट्टा दिया जाता है। इसके बाद पात्र भूमिहीन अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग के भूमिहीन कृषि श्रमिक या गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले सामान्य वर्ग के व्यक्तियों को वरीयता प्रदान करते हुए कृषि योग्य भूमि का पट्टा दिया जाता है। पात्रों को कृषि हेतु भूमि का पट्टा देकर प्रदेश सरकार उन्हें आत्मनिर्भर बनाती है। जो लोग भूमिहीन रहे हैं, और दूसरों की भूमि पर काम करके अपनी जीविका चलाते थे, ऐसे लोग अब अपनी भूमि होने पर भूमि सुधार कर कड़ी मेहनत कर अपने परिवार के लिए अन्न पैदाकर खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वर्तमान प्रदेश सरकार ने प्रदेश के हजारों पात्र भूमिहीनों को भूमिधर बनाते हुए अब तक 4269 हेक्टेयर कृषि भूमि का पट्टा आवंटन किया है।

प्रदेश सरकार आवासहीन व्यक्तियों जिनके पास घर बनाने के लिए भूमि नहीं है, उन्हें आवास बनाने हेतु भूमि आवंटित करती है। प्रदेश के अनुसूचित जाति, जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों, गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले सामान्य वर्ग के व्यक्तियों, ग्रामीण कारीगरों के परिवार सहित जिनके पास पर्याप्त आवास नहीं है ऐसे लोगों को प्रदेश सरकार आवास स्थल उपलब्ध कराते हुए आवास पट्टा देती है। आबादी स्थलों के आवंटन में पात्र विधवा महिला और दिव्यांग व्यक्तियों को वरीयता दिया जाता है। प्रदेश में 2018-19 से अब तक लगभग 50 हजार पात्र परिवारों को आवास स्थल आवंटित करते हुए उन्हें छत मुहैया कराया गया है। आवंटित आवास स्थलों पर अपना घर बनाकर आवंटी परिवार सर्दी, गर्मी, बरसात से बचते हुए खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

प्रदेश सरकार मत्स्य पालन को बढ़ावा दे रही है। मत्स्य पालन हेतु ग्राम सभा के तालाबों, पोखरों को मछुआ समुदाय व अन्य पात्र व्यक्तियों को 10 वर्ष हेतु पट्टा देकर पट्टाधारकों को रोजगार से लगाती है। मछली जलीय पर्यावरण पर आश्रित जलचर जीव है तथा जलीय पर्यावरण को संतुलित रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती हे। गांवों के तालाबों, पोखरों को स्वच्छ और जल जैविक स्थिति सामान्य बनाये रखने के लिए उनमें मत्स्य पालन भी जरूरी होता है। प्रदेश सरकार ग्राम पंचायतों के तालाबों, पोखरों को पात्र मछुआ समुदाय अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग एवं मछुआ सहकारी समितियों व गरीब सामान्य वर्ग के व्यक्तियों को नीलामी के माध्यम से सम्बंधित क्षेत्र के तहसीलों द्वारा पट्टा दिया जाता है। मत्स्य पालन हेतु दिये जा रहे तालाबों, पोखरों, झीलों के पट्टों से लाखों लोगों को रोजगार मिला है। प्रदेश में वर्ष 2018-19 से अब तक 15233 हेक्टेयर तालाबों का पट्टा देते हुए हजारों परिवारों को रोजगार से लगाया गया है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी प्रदेश में माटीकला को बढ़ावा देते हुए माटीकला बोर्ड का गठन किया है। माटीकला हेतु बनने वाले मिट्टी के खिलौने, मूर्तियां, दीयें आदि बनाने वाले कुम्हारों कलाकारों को चिकनी मिट्टी की जरूरत पड़ती है जिसे सम्बंधित ग्राम सभा में प्राप्त तालाबों, पोखरों, स्थल को कुम्हारीकला हेतु आवंटित किया जाता है। कुम्हारीकला के व्यवसाय में लगे परिवारों के आर्थिक उन्नति एवं उनके व्यवसाय हेतु उपयुक्त चिकनी मिट्टी के स्थल को आवंटित कर उन्हें रोजगार से लगाया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 7797 स्थलों का 24,000 परिवारों को आवंटन करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया गया है।

धरती पर रह रहे विभिन्न जीवों के लिए पारिस्थितिकीय संतुलन जरूरी है। जीवन के लिए वृक्ष आवश्यक है। वृक्षों से समस्त जीवों को जीवनदायिनी ऑक्सीजन मिलती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पूरे प्रदेश में इस वर्ष 25 करोड़ से अधिक वृक्ष एक दिन में लगाते हुए विश्व रिकार्ड बनाया गया है। प्रदेश सरकार ग्राम समाज की जमीनों को वृक्षारोपण हेतु देती है। वृक्षारोपण करने वाले व्यक्तियों को केवल वृक्षों के उपयोग तथा उपज व उनसे होने वाले लाभ हेतु पट्टा दिया जाता है। प्रदेश में अब तक 1494 हेक्टेयर भूमि को वृक्षारोपण हेतु पट्टा दिया गया है जिस पर पट्टाधारकों द्वारा वृक्षारोपण किया गया है।

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