कर्मकाण्ड एवं ज्योतिष की मिसाल है हिमाचल के पांगणा का गांव थाच

राज शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला की पांगणा उप-तहसील के मुख्यालय से लगभग चार किलोमीटर दूर बसा थाच गांव समुद्र तल से लगभग 1275 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। चारों ओर से हरे-भरे पेड़ इसको प्राकृतिक सौंदर्य  प्रदान करते हैं। अपनी इसी खूबसूरती के कारण यह गांव बहुत भव्य लगता है। थाच गांव की आबादी लगभग 200 के आसपास है। गांव में सभी परिवार ब्राह्मणों के हैं। गांव का नाम थाच क्यों पड़ा यह तो किसी को पता नहीँ, लेकिन सुकेत संस्कृति साहित्य एवं  जन कल्याण मंच पांगणा के अध्यक्ष  डॉक्टर हिमेन्द्र बाली “हिम” का  कहना है कि भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश द्वारा 2010 में  प्रकाशित हिमाचल प्रदेश के स्थान नाम व्युत्पत्तिजन्य विवेचनात्मक अध्ययन नामक पुस्तक में लिखा है कि हिमाचल  प्रदेश में जंगल और चरागाहो में भेड़-बकरियों को ठहराने के निश्चित विश्राम स्थलों को थाच कहा जाता है।

संस्कृति मर्मज्ञ डॉ.जगदीश शर्मा का कहना है कि राजसी काल से लेकर 1960-65 तक इस गांव के आस-पास की चरागाहो में किन्नौर से पांगणा हो होकर न्यूल की ओर जाने वाले भेड़-बकरी पालक किन्नौरो और मंडयालो का थाच में पड़ाव था। प्रचूर मात्रा में चारा उपलब्ध होने से संभवतः इसी आधार पर यहाँ का नाम थाच पड़ा होगा। किन्नौर में बर्फ पड़ने से किन्नौरे भेड़-बकरियों के साथ निचले गर्म इलाको को निकल जाते थे। अपने साथ हींग, कडू, पतीस, शिलाजीत, न्योजा, सूखी खुमानी, पशम, सेली, फरना, काला जीरा, कूठ आदि साथ लाते थे। थाच के आस-पास के जंगलों में आज भी स्थानीय पालतु पशु चराए जाते हैं।कभी गुरुकुल पद्धति के लिए मशहूर थाच आज परंपरागत पंडिताई और ज्योतिष के कारण बहुत प्रसिद्ध है।

अध्यापक घनश्याम शास्त्री, अध्यापक और साहित्यकार किशोरीलाल शर्मा, एमबीबीएस के बाद स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त कर रहे डॉक्टर गोपाल शर्मा, एमबीबीएस डॉक्टर किरन शर्मा, विद्युत विभाग के सेवानिवृत सहायक अभियंता राजेन्द्र शर्मा, अंग्रेजी  के प्रवक्ता उत्तम शर्मा, हैड कांस्टेबल इन्द्रदेव शर्मा, बालकृष्ण शर्मा, राधाकृष्ण शर्मा, रिपन शर्मा, लोक निर्माण विभाग में सेवारत गुरविंदर शर्मा, गोविन्द राम शास्त्री आचार्य, हंसराज शास्त्री आचार्य, सरस्वती विद्या मंदिर पांगणा मे अध्यापक रामलाल शास्त्री आचार्य तथा लाल बहादुर शास्त्री विश्वविद्यालय दिल्ली से प्रशासनिक सेवा में कार्यरत अधिकारियों का ज्योतिष दृष्टि से परामर्श विषय पर पीएचडी कर रहे चिन्तराम शर्मा आचार्य, बीटैक जगदीश शर्मा, जेबीटी मुकेश शर्मा, ऐतिहासिक पांगणा की दूसरी बार प्रधान बनी शांता शर्मा, थाच की पूर्व पंचायत समिति सदस्य रमा शर्मा, पांगणा पंचायत के पूर्व उपप्रधान रहे कामेश्वर शर्मा तथा थाच के स्व. मोतीराम आदि ने मीलों पद यात्राएं कर लोगों को शिक्षा का संदेश देकर साक्षरता का कद ऊंचा किया है।

थाच मे श्री कमरुदेव जी तथा प्राचीन पीपल के चबूतरे पर शिवलिंग के रुप में भोलेनाथ जी विराजमान हैं। ये दोनों आराध्य देव समस्त थाच वासियों की ही नहीं, अपितु आस-पास के पंचायत वासियों की मनोकामनाएँ सिद्ध करने वाले हैं। कमरुदेव मंदिर आधुनिक शैली में बना है। मंदिर के अंदर गर्भगृह में कमरुदेव जी की पत्थर की प्रतिमा है। सभी गांव वासी कमरुदेव जी के अनन्य भक्त हैं। इस मंदिर की व्यवस्था के लिए समिति का गठन किया गया है। थाच वासी बहुत ही सरल स्वभाव के मेहनतकश, मृदुभाषी, स्पष्टवादी आतिथ्य सत्कार वाले संस्कारी लोग हैं। व्यापार मंडल पांगणा के प्रधान सुमित गुप्ता और डॉक्टर जगदीश शर्मा का कहना है कि थाच गांव के कुफरीधार को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा सकता है।

संस्कृति संरक्षक आनी (कुल्लू) हिमाचल प्रदेश

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