कुमार विश्वास चालीसा

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

शारद पूत रसिक कवि,हिन्दी का उत्थान।
गली गली का लाड़ला,कहत हैं कवि मसान।।
कुमार कविता जग में छाई।
हिन्दी भाषा अलख जगाई।1
रग रग गाती मां की भाषा।‌
हिन्दी आशा जग विश्वासा।2
फरवरि दसवी सत्तर आया।
बाद गाजिया शोर मचाया।।3
पंच बसंती शारद  पूता।
कविवर बेटा साहित दूता।।4
राशि कुंभ जगत उजियारा।
भये कुमारा तारण हारा।।5
पिता चंद्र रमा है माता ।
पढ़नालिखना घर का नाता।।6
पिलखुआ गांव करी पढ़ाई।
ऊंची तालिम मेरठ पाई।।7
गणित ज्ञान से नाता तोड़ी।
हिन्दी शिक्षा दिल से जोड़ी।।8
शोध कौरवी लोक चेतना।
लोक गीत में गीत भेदना।।9
मंजू शरमा है घरवारी।
अग्र कुहू है बेटी प्यारी।।10
सुंदर गोरा रूप सलौना।
हंसमुंख सूरत शब्द खिलौना।।11
हंसती आंखें मीठी वाणी।
भाषा सेवा अलख जगाणी।।12
सन चौराणु बन व्याख्याता।
हिन्दी भाषा भाग्य विधाता।।13
भ्रष्ट विरोधा अन्न हजारे।
जिनके भी तुम बने सहारे।।14
राजनीति में जब तुम आये।
प्रोफ़ेसर का पद ठुकराये।।15
आम आदमी दल में आये।
वहं पे भी तुम धोखा खाये।।16
राहुल गांधी से भी हारे।
छोड़ पार्टी गीत संवारे।।17
रंग दिखाया दुनिया भाई।
काल गति से परे चिंताई।।18
फिर कविता मे धाक जमाई।
जग ने देखी सब चतुराई।।19
मां शारद का आशीष पाया।
कवि कुमार विश्वास जगाया।।20
इक पगली लड़की भी आई।
कोइ दिवाना कहता भाई।।21
श्रृंगार रसिकों की बन टोली।
देश प्रेम की कविता बोली।।22
शांतिकाल सिंगार सुनाते।
समय समय पर वीर ढहाते।।23
हिन्दी की जब करे बुराई।
तब तब भाषा ऊपर आई।।24
पांच लाख है फीस तुम्हारी।
नई पीढ़ी के हो अधिकारी।।25
गरम चाय में अभिनय करते।
 नई फिल्मों में गाना भरते।।26
टीवी धारावाहिक दिखते।
मंचों का संचालन करते।।27
फेन तुम्हारे फोन लगाते।
फिर भी वे उत्तर नहि पाते।।28
दुबइअमरिका सिंगा धाबी
रुस नेपाल कविता दागी।।29
अर्कुट फेसाबुक तुम आये।
 ऑनलाइन रस बरसाये।।30
कुंवर बेचैन मान कमाया।
अलंकरण भी तुमने पाया।।31
देवदास मत होना भाई।
मैं तो झोका लगत हवाई।।32
प्रीतों फोन तुम्हारा आया।
सुनकर मन ही मन हरषाया।।33
कोइ दिवाना कहता भाई।
कोई विरहा सहता आई।।34
कविता से नव पीढ़ी जोड़ी।
रूढ़ियां भी  तुमने तोड़ी।।35
नेता अभिनेता अरु लेखक।
अच्छे गायक जन के सेवक।।36
उपमा रूपक कविता धारी।
गीत गजल का संग्रह भारी।।37
शब्दों के तुम हो जादूगर।
भ्रष्टाचारी करी उजागर।।38
स्वागत है विश्वास तुम्हारा।
हिन्दी गायन लगता प्यारा।।39
जो भी यह  चालीसा गावे।
छंद मातरा तुरत सिखावे।।40
हिंदी भाषा के कवी,सरल ज्ञान विद्वान।
विश्वास विश्न छा रहा,कहत है कवि मसान।।
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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