त्योहारों में की ढिलाई, कोरोना ने फिर हाहाकार मचाई

प्रीति शर्मा “असीम “, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

जी हां! सही कहा गया है कि जब सावधानी हटती है, तो दुर्घटनाएं भी घटती  है। यही हुआ कोरोना के साथ। लॉकडाउन और कोरोना महामारी के दौरान लोगों को जिन सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए था, उसमें त्योहारों के आने पर धीरे-धीरे लोगों ने उन सुरक्षा नियमों की अवहेलना करनी शुरू कर दी, जिसके कारण कोरोना ने धीरे-धीरे फिर से विकराल रूप धारण कर लिया है। इस विकराल रूप के चलते हुए देश के विभिन्न भागों में फिर से लॉकडाउन लगाने जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, ताकि कोरोना  के बढ़ते हुए मामलों को रोका जा सके। देश के कई राज्यों में फिर से नाइट कर्फ्यू और सुरक्षा की नई सूचियां भी जारी कर दी गई हैं। इतने लंबे समय से जो  संपूर्ण विश्व इस महामारी से गुजर रहा है। असंख्य लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं।
भारत में जब त्योहारों का सीजन आया तो देश की अर्थव्यवस्था और समाज में फैली बेरोजगारी और लोगों के मनों में लॉकडाउन के दौरान घर बैठने की ऊब ने लोगों को फिर से त्योहारों में एक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए कोरोना महामारी संबंधी सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर देने के लिए उकसाया। नतीजा हम सबके सामने हैं। फिर से देश में त्योहारों के दौरान बाजारों में उमड़ी अत्यधिक भीड़ ने कोरोना के मामलों को और अधिक बढ़ा दिया। सभी की जरा-सी लापरवाही से कोरोना के मामलों का निरंतर बढ़ना उन लोगों के कारण भी है जो इसे अभी भी गंभीर रूप से ले नहीं रहे हैं और इसे मजाक ही समझ रहे हैं कुछ नहीं होता-कुछ नहीं होता कहकर पल्ला तो झाड़ रहे हैं, लेकिन औरों को इस संक्रमण की ओर धकेल रहे है।
एक सभ्य समाज का सदस्य होने के कारण हम सभी का यह फर्ज बनता है कि खुद भी सुरक्षित रहें और औरों को सुरक्षा का भी ध्यान रखें, क्योंकि जब हम सुरक्षित रहेंगे तो हमारे साथ समाज भी सुरक्षित रहेगा। फिर से एक बार कड़े नियम अपनाने होंगे अपने आसपास की सफाई रखें, हाथों को बार-बार धोए। सर्दियों के मौसम में यह और ज्यादा विकराल हो सकता है, इसलिए बचाव रखें ठंड से बचते हुए कोरोना के  नियमों का पालन करें और औरों को भी इन नियमों का पालन करने के लिए उत्साहित करें। ताकि हम जल्द से जल्द कोरोना महामारी को दूर करके फिर से जीवन को व्यवस्थित कर सकें।
नालागढ़, हिमाचल प्रदेश

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