गैर कानूनी नियुक्ति करने पर चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति, कुलसचिव और अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज

शि.वा.ब्यूरो, सिरसा। चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति, कुलसचिव और अन्य के खिलाफ हिमानी शर्मा को गैर कानूनी तरीके से लेक्चरार नियुक्त करने के मामले में भ्रष्टाचार का मकदमा दर्ज किया गया है।
मामला चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय सिरसा की सहायक प्रोफेसर हिमानी शर्मा की नियुक्ति से जुड़ा है। आरोप है कि हिमानी शर्मा जो वर्तमान में हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस, गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है, कि गैर कानूनी तरीके नियुक्ति करने के मामले में यूनिवर्सिटी के तत्कालीन उपकुलपति डा.केसी भारद्वाज, तत्कालीन रजिस्ट्रार डा.वजीर सिंह नेहरा, तत्कालीन डिप्टी रजिस्ट्रार एनसी जैन, तत्कालीन सहायक रजिस्ट्रार हवा सिंह, विधि अधिकारी, बलजीत कुमार शर्मा तथा बजरंग लाल, केके असीजा व मदन सिंह सहायकों और अन्य अज्ञात अधिकारियों गर्दन कानून के शिकंजे में फंसती नजर आ रही है। इन सभी के खिलाफ पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) और 13 (2) और भारतीय दंड संहिता की धारा 119, 120 बी, 166, 167, 217, 218, 408, 409, 418, 420, 463, 464, 465, 467, 468, 470, 471, 474 के तहत जगाधरी निवासी डॉ. संभव गर्ग की सबूतों के साथ की गई शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया हैं।
आरोप है कि हिमानी शर्मा को चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी में गैर कानूनी तरीके से आपराधिक साजिश के तहत अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा अपनी पद का दुरुपयोग करके और कानून और विश्वास की धज्जियाँ उड़ाते हुए जालसाजी और धोखाधड़ी करके झूठे, जाली और गलत दस्तावेज और रिकॉर्ड बनाकर नियमित लेक्चरार के पद पर नियुक्त करके उसे सरकारी खजाने से वर्षों तक वेतन का गैर कानूनी तरीके से भुगतान किया था। इतना ही नहीं इन बेखौफ अफसरों-कर्मचारियों ने उसे बाद में इसी पद पर अवैधानिक तरीके से समायोजित करते हुए कन्फर्म भी कर दिया गया था।
शिकायतकर्ता के अनुसार वर्ष 2006 में सीडीएलयू ने व्यवसाय प्रशासन के विषय में नियमित आधार पर लेक्चरार के तीन पद विज्ञापित किए थे। 5 अगस्त 2007 को इस पद के लिए साक्षात्कार भी आयोजित किया गया था, जिसमें तीन उम्मीदवारों का विधिवत चयन किया गया था। उल्लेखनीय है कि लेक्चरार के पद पर नियुक्ति के लिए भर्ती, चयन प्रक्रिया और बनी मेरिट सूची के दौरान नियुक्ति के लिए विज्ञापित पदों की संख्या में कोई वृद्धि भी नहीं की गई थी। उस समय हिमानी शर्मा वा दो अन्य उम्मीदवारों को प्रतीक्षा सूची में ही रखा गया था। मतलब कि उनका चयन नहीं किया गया था। इसके बाद आरोपियों ने सिर्फ हिमानी शर्मा को अवैध तरीके से लेक्चरार का कोई पद मौजूद न होने के बावजूद रीडर के ऐसे पद के विरुद्ध लेक्चरार के पद पर लगा दिया गया, जिसके लिए विज्ञापन तक प्रकाशित नहीं दिया गया था। बाद में हिमानी शर्मा की अवैध तरीके से लेक्चरार के पद पर पुष्टि कर दी गई और वर्ष 2007 से 2013 तक लगातार राज्य के खजाने से हिमानी शर्मा को वेतन का भुगतान किया गया।
वर्ष 2013 में हिमानी शर्मा ने इस यूनिवर्सिटी में अपना पद रिजर्व रखवाते हुए गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में सहायक प्रोफेसर के पद पर नौकरी शुरू कर दी। आरोपियों के अनुसार यह भी संदेहजनक है कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों ने कभी हिमानी शर्मा को नियमित आधार पर लेक्चरार के पद पर लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी भी दी थी, या नही। क्योंकि उस कार्यवाही पर स्पष्ट रूप से काटने की लाइन मौजूद है, जिसके आधार पर हिमानी शर्मा पत्र जारी किया गया था।

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