जल ही जीवन है

डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

नीर वारिजल पय औ पानी।
हिन्दी कविता लिखी मसानी।।1
इस जग में  है बहु  विज्ञाना ।
भौतिक रस अरुजीव समाना।2
भौतिक बाहर अंत रसायन ।
प्राणी  पौधे  जीवा आयन ।।3
चुम्बक विद्युत ध्वनी प्रकाशा।
धरती तारे भौतिक  खासा ।।4
टू एच ओ से पानी बनता।
सभी जीव के दुखड़ा हरता।।5
जल ही जीवन जल ही आशा।
कर संरक्षण जल विश्वासा।।6
जल को रोके बांध बनाई।
होती जिससे फसल सिंचाई।।7
जल सिंघाड़े मोती आई।
जलसे बिजली मिलती भाई ।8
जल से करते साफ सफाई ।
जल से मछली  पलती भाई ।9
निर्मल पानी प्यास बुझाओ।
नदी सरोवर साफ कराओ।।10
जल ही चम्बल जल ही रेवा।
जल ही गंगा जल से सेवा।।11
गरमी आती  सूख  सरोवर।
पानी रोको देश धरोहर ।।12
जल के जैसा रहना भाई।
मन को मारें करें भलाई।।13
आगर (मालवा) मध्य प्रदेश

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