ठंड की दस्तक

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

मन हुआ विभोर
महकी-महकी भोर
हो गई ठंड की दस्तक

दाँत लगे किटकिटाने
सुबह-सुबह शोर मचाने
हो गई ठंड की दस्तक

चाँदी सी चमकें बूँदे ओस की
नभ में किरणें मंद हुई रवि की
हो गई ठंड की दस्तक

चाँदनी रात में चाँद मुस्कराये
चंदा – चकोरी गीत मधुर गाये
हो गई ठंड की दस्तक

गौरी का सौंदर्य निखरा
देख मनवा हुआ बावरा
हो गई ठंड की दस्तक

ठीक से करो स्वास्थ्य की देखभाल
कोरोना से सारा जग बेहाल
हो गई ठंड की दस्तक

ग्राम रिहावली, डाक तारौली गुर्जर, फतेहाबाद, आगरा 

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