अधूरी ख्वाहिशें

डॉक्टर मिली भाटिया आर्टिस्ट, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

अधूरी ख्वाहिशें
सपनों में पूरी करने लगी हूँ….
मन में सपने थे
सगाई में माँ की शादी की
कांजीवरम साड़ी पहनूँगी…..
संगीत में हैशटैग
बेबी पिंक कलर का ईवनिंग गाउन
माँ बेटी एक जैसा पहनेंगी……
क्राउन लगा कर
स्टेज पर सेल्फ़ी
लेते हुए खुद को
महारानी की प्रिन्सेस
समझ कर मुस्कुराऊँगी
शादी में माँ के फ़ेवरैट कलर
मरुन रंग के लहंगे में
माँ-बेटी काजल में आँसू
और मुस्कुराहट लिए
हाथों में रूबी एमरेलड की अंगूठी
दमकती हुई
हाथ थामे तुम्हारा
तुमसे दूर नहीं जाने की
ज़िद्द ठान लेती
तुम नज़रें उतारती नहीं थकतीं
किसे पता था
तुम अपनी टीनेजर बिटिया को छोड़
कर चली जाओगी
अपनी बिटिया की
शादी का अधूरा सपना लिए
आज तुम्हारी तरह
करवाचोथ पर
लाल सिंदूर से
माँग भरती हूँ माँ
तुम्हारी ही तरह
देवी माँ के थाल से लेकर
लक्मे के लिक्विड सिंदूर में वो बात कहाँ
जो तुम्हारी चाँदी की
सिंदूरदानी के “कुमकुम”में है
“ नल्ली” से बनारसी, कांजीवरम साड़ी
लेते हुए,
दिल में कसक
रह जाती है
काश तुम होतीं माँ
तो विडीओ कॉल से तुम्हें
पसंद करवाती
पूछती माँ चेन्नई से साउथ की
गोडेस माँ लक्ष्मी वाले झुमके भी ले लू
एक जैसे तुम्हारे-मेरे
तुम होती तो “तनिष्क”
से शंक-पोला की चूड़ियाँ लेती
तुम्हारे बर्थडे पर
साथ में मैचिंग की बंगाली नथ
ऑनलाइन तुम्हें भेजती
प्यार भरा गिफ़्ट
पता है
तुम देख कर ग़ुस्सा करती
कहती कितना ख़र्चा करती है
ये लड़की
और कहती तेरी बेटी
के लिए रख देती हूँ
सम्भाल कर
तुम और में साथ जाते
“तनिष्क”,”नल्ली”
पापा और तुम्हारे दामाद को तो
जड़ाऊ कंगन,बनारसी साड़ी
की पहचान ही नहीं
कितनी याद आती है तुम्हारी
बता नही सकती किसी को
नातिन तुम्हारी छोटी है अभी
पर हम दोनो माँ-बेटी
त्योहारों पर हमेशा
रहती हें मैचिंग-मैचिंग
तुम्हारे साथ के अधूरे अरमान
पूरे करने की कोशिश
करती हूँ
शब्दों को काग़ज़ पर उतार रही हूँ
कविता लिखनी कहाँ आती है
मुझे माँ
सपने ही रह गये
तुम्हारी बेटी के
तुम्हारे-मेरे अधूरे सपने
पूरे करूँगी
तुम्हारी नातिन “लिली”
की शादी में….
जब कहते हें सब
“मिली” बड़ी बिंदी लगा कर
अपनी माँ “श्यामा”जीजी-भाभीजी
जैसी लगती है
आँख भर जाती हें
पर छुपा लेती हूँ आँसू
लोग कहते हें
मुस्कुराती बोहोत है
हंसती भी बोहोत है
बोलती भी बोहोत है
लड़ती भी बोहोत है
पर कुछ अपने हें जो जानते हें
रोती भी बोहोत है
कभी-कभी बिलकुल चुप हो जाती है
स्ट्रोंग है लेकिन
हूँ तो आख़िर तुम्हारी बेटी…
होती तुम आज तो
सपने अधूरे नहीं रहते
अगले जन्म में करेंगे पूरे
तुम्हारी ही बिटिया बनूँगी माँ
जन्म- जन्म में
बोहोत दिन बाद
आज कुछ लिखा
सोच रही हूँ कहाँ थी में
इतने दिनो से
वापिस “मिली” हूँ खुदसे
अधूरी ख्वाहिशें
सपनों में पूरी करने लगी हूँ….
माँ अब में लिखने लगी हूँ……!!!
रावतभाटा राजस्थान

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