71वें संविधान दिवस पर श्रीराम काॅलेज ऑफ़ लाॅ में ऑनलाईन सेमिनार आयोजित

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। आज 71वें ‘संविधान दिवस’ के अवसर पर श्रीराम काॅलेज ऑफ़ लाॅ  द्वारा एक ऑनलाईन सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसका विषय था ‘‘भारतीय संविधान का विकास‘‘। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप मे सुन्दरदीप ग्रुप ऑफ इंस्टीटयूशन गाजियाबाद से  डाॅ0 अर्पणा सोती तथा बीडीएस काॅलेज मेरठ से सौरभ श्रीमाला सम्मिलित हुई।
कार्यक्रम का प्रारम्भ करते हुए श्रीराम काॅलेज ऑफ लाॅ की प्रवक्ता आँचल अग्रवाल ने कहा कि संविधान भारत का राजधर्म है। संविधान का निर्माण 1946 में गठित संविधान सभा ने किया। प्रारूप समिति के सभापाति डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर ने संविधान पारण का प्रस्ताव रखा एवं इसी कारण 26 नवम्बर 1949 की तिथि भारतीय गणतंत्र के लिए ऐतिहासिक महत्व की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 11 अक्टूबर 2015 में घोषणा की थी कि 26 नवम्बर का दिन प्रत्येक वर्ष संविधान दिवस के रूप में मनाया जायेगा। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने इस विषय में अपने-अपने विचार प्रस्तुत किये।

सर्वप्रथम दिव्या संगल ने कहा कि भारतीय संविधान अपने मे विषेष अधिकार समाहित किये हुए है और एकता व अखंडता बनाये रखने में पूरी तरह सुदृढ़ है। शशांक अग्रवाल ने कहा कि संविधान दिवस को यदि राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाया जाये तो निश्चय ही आम जनमानस जागरूक होगा। सुरभि ने कहा कि भारतीय संविधान देश की अमूल्य धरोहर है। इसे संरक्षित करने का प्रयास हर एक भारतीय को करना चाहिए। तरूणा ने कहा कि प्रत्येक भारतीय को देश के स्वतन्त्रता सेनानियो, भारत की राष्ट्रीय धरोहरो, भारत के राष्ट्रध्वज एवं राष्ट्रगान का आदर करना चाहिए। विश्वजीत ने कहा कि भारतीय संविधान के निर्माताओं ने संसार के अनेक संविधानों से अनुभव लेकर भारत के लिए एक अद्वितीय संविधान का निर्माण किया है।


बतौर मुख्यवक्ता डाॅ0 अर्पणा सोती ने कहा कि भारत देश को महान बनाने के लिए संविधान का पालन और उसके अनुसार आचरण किया जाना अति आवश्यक है। प्रत्येक भारतीय को मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी बोध होना चाहिए। भारतीय संविधान के इतिहास से अवगत कराते हुए एकान्तता के अधिकार के बढ़ते आयामो तथा जीवन के अधिकार में पर्यावरण की आवश्यकता पर अपने विचार प्रस्तुत किये। सौरभ श्रीमाला ने संविधान क्या है तथा इसके विकास की प्रक्रिया को विस्तार से बताते हुए कहा कि संविधान में वर्णित अधिकार तथा कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू है। अधिकारो से पहले कर्तव्यों का पालन आवश्यक है। महिलाओं के अधिकार तथा शोषण पर विचार व्यक्त किये। महाविद्यालय की विभागाध्यक्ष ने आये हुए समस्त अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन प्रवक्ता आँचल अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संजीव तोमर, सोनिया गौड, आँचल अग्रवाल, सबिया खान एवं मौहम्मद आमिर आदि का सहयोग रहा।

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