मनहर कवित्त (मुक्तक 16,15=31वर्ण)

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

एक बार बंदौ रानी दूजी विमला को ध्याऊं,
तीन विद्या देवी गाऊं चार महारानी को।।
पांच बार बंदौ देवी छह बार शारदाय ,
सात हंस वाहिनी है आठ वाग देवी को ।।
जगत को जस देती भारती मसान कहे,
 मौको  बुद्धि देवो माता सांची करो वाणी को।।
 नव वार बंदौ मैया दस कंठ देवी गाऊं,
बार बार गाऊं माता रानी वीणा पाणि को।।1
बेटी बिनु बेटा नहीं बिटिया नहीं भाई है,
आंखन में आंसू आये बेटी की बिदाई है।
शहनाई बाज रही सखियां भी बाज रही,
बूंदन से आखें भरी बेटी की जुदाई है।
कोख में तो कन्या आई भ्रूण को गिराई है,
देखो धोरे कोट पहने आ गये कसाई हैं।
कलजुग छा गयो है पाप मंडरा रहो है,
प्रभु आज तूने ही तो बेटी को बचाई है। 2
 *कुण्डली (मात्रिक छंद)*
बेटी निंदा जो करें, बाको नहि है ठौर।
 बेटी बेटा एक से, कर लो थोड़ी गौर।
कर लो थोड़ी गौर, बिटिया मेरिट में आय।
सुनीता कल्पना जोर, अकाश  उड़ान भरे।
कह मसान कविराय, बेटी का कीजे सम्मान।
वे नर नरकहिं जायं, जो करें बेटी निंदा।।
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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