सत्य की रोशनी

कुँवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

सत्य की एक किरण ही मन और भ्रम का अन्धेरा भगाने में पर्याप्त है। बड़े बड़े ग्रंन्थों का बार बार किये जाने वाला अध्ययन भी जो नहींं कर पाता ,सत्य की एक झलक वह कर दिखाती है। अंधेरे में रोशनी के लिए प्रकाश का वर्णन करने वाले शास्त्र किसी काम के नहीं, मिट्टी का एक दिया जलाना ही काफी है।
           रॉल्फ वाल्डो इमर्शन के व्याख्यानों में एक बूढ़ी धोबन निरन्तर देखी जाती थी। लोगों को हैरानी हुई कि एक अनपढ़ बूढ़ी औरत ईमर्सन की गम्भीर वार्ताओं को भला क्या समझती होगी? कुछ उसकी हँसी उडा़ते, कुछ ऐसे भी थे, जो जानना चाहते थे कि उसकी समझ में क्या आता है? आखिर एक दिन किसी ने उससे पूँछ ही लिया कि उसकी समझ में क्या आता है? उस बूढ़ी धोबन ने जो उत्तर दिया वह अद्भुत था। इतना अद्भुत कि सब उसे देखते ही रह गये। उसने कहा मैं जो नहीं समझती, उसे क्या बताऊँ, लेकिन एक बात मैं खूूब समझ गयी हूँ, पता नहीं, दूसरे उसे समझते हैं या नहीं? मैं तो अनपढ़ हूँ,  लेकिन मेरे लिये एक बात ही काफी है, जिसने मेरा सारा जीवन बदल दिया। वह यह है कि मैं प्रभु से  दूर नहीं हूँ। एक अज्ञानी दरिद्र स्त्री से भी प्रभु दूर नहीं है, निकट ही है और मुझमें है। यह एक छोटा सा सत्य मेरी समझ में आ गया। यह सबसे गौरवशाली और संतोष देने वाली बात है, इसलिये कुछ और खोजने की जरूरत नहीं रही। जो लोग बहुत जानने में लगे रहते हैं, वे अक्सर सत्य की छोटी सी रोशनी से वंचित रह जाते हैं, जिससे जीवन में परिवर्तन और बोध के नये आयाम उद्घाटित होते हैं।
 रा.अध्यक्ष *जय शिवा पटेल संघ

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