डा.मिली भाटिया एक बार नही, कई बार धारण कर चुकी है देवी चंडी का रूप

डा.मिली भाटिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

नवरात्रि शुरू होने वाले हैं, इस दौरान देवी के नो रूपों की पूजा होती है। हम नारी को भी देवी कहते हैं। स्त्री होने के नाते मेरे जीवन में वह पल कई बार आये, जब देवी माँ चंडी के रूप को खुद में महसूस कर गलत के खिलाफ उठ खड़ी हुई। डा.भाटिया बताती है कि वे खुद को हमेशा से झाँसी की रानी कहलाती आई हूँ। उन्होंने बताया कि बचपन में तो इतनी समझ नहीं थी, लेकिन जैसे-जैसे थोड़ी बड़ी हुई, मैंने माँ के प्रति दादी के व्यवहार पर कक्षा 8 से ही आवाज उठानी शुरू कर दी थी। मिली भाटिया बताती हैं कि उन्होंने अपने मम्मी-पापा के खिलाफ आज किसी की भी एक आवाज तक नहीं सुनी है।
उन्हांेने बताया कि बात 2003 की है, जब वे इंटर की परीक्षा पास कके बीए में आई थी, उसी दौरान उनकी मम्मी का स्वर्गवास हो गया था। हॉस्टल से जब छुट्टीयों में घर आती थी, तो शरारती लड़के फोन करके परेशान करते थे। पापा के ऑफिस जाते ही लैंडलाइन फोन की घंटियाँ बजनी शुरू हो जाती थी। उसी दौरान एक बार एक लड़के ने कहा था कि तुम तो अकेली रहती हो, इकलौती हो, अपने पापा को क्या बताओगी। उसकी बात सुनकर मैंने उसे जवाब दिया था कि अब तो तेरे पापा ही तुझे बताएँगे और जब शाम को पापा ऑफिस से आए तो मैंने सारी बात उन्हें बता दी। बस फिर क्या था फोन नम्बर की लिस्ट निकाल कर हम फोन करके परेशान करने वाले शरारती लड़कों के घर पहुँच गये और पूरी शान्ति और संयम के साथ बस इतना कहा कि आपके घर से फोन आते हैं, अब नहीं आने चाहिए और अगले दिन से फोन आने बिलकुल बंद हो गये थे।

डा.मिली भाटिया आर्टिस्ट बताती हैं कि स्नातक की पढ़ाई के दौरान एक बार वे हॉस्टल से ऑटो करके बस स्टैंड पहुँच रही थी कि एक लड़का बाईक पर सवार होकर पीछा करते हुए बस स्टैंड पहुँच कर परेशान करने लगा तो मैंने बिना कोई संकोच किये शोर मचा दिया, जिससे वहां लोग एकत्र हो गये और एक बुजुर्ग ने उस युवक को जोरदार थप्पड़ भी रसीद कर दिया, जिसके बाद उसने साॅरी-साॅरी कहकर अपना पीछा छुडाया था। डा. भाटिया एक संस्मरण सुनाते हुए बताती हैं कि मेरे पापा द्वारा मुझे स्ट्रोंग बनाने के कारण मैं बिना झिझक हमेशा अकेले ही सफर करती थी। इसी के चलते स्नातकोत्तर की पढ़ाई के दौरान एक बार सिंगल स्लीपर बुक कराकर बस द्वारा घर से वापिस हॉस्टल जाना था, लेकिन जब मैं बस में अपने स्लीपर तक पहुँची तो देखा कि वहां पहले से ही शराब का सेवन किये हुए दो लोग बैठे थे। उन्हें वहां से हटने के लिए बार-बार बोलने के बावजूद भी जब वे नहीं हटे तो मैंने पूरी बस में तूफान सा मचा डाला था। अन्ततः उन दोनों शराबियों को जान बचाकर वहां भागना ही पड़ा था। मिली कहती हैं कि उनके पापा ने कभी मुझे बेटा नहीं कहा, हमेशा गर्व से बेटी ही कहा है।
डा.मिली भाटिया बताती हैं कि वे अपनी 6 साल की इकलौती बिटिया लिली को भी यही सीख दूँगी कि गलत के खिलाफ हमेशा बिना डरे आवाज उठाये। नारी के अंदर देवी माँ के नो रूप विराजमान हैं, जिनकी शक्ति के आगे तो समस्त देवता भी नतमस्तक होते हैं। वे बताती हैं कि देवी शक्तिस्वरूपा हैं, वे ही सर्वशक्तिमान भी हैं। डा.मिली भाटिया बताती हैं कि चित्रकला में एमए करने के दौरान देवी स्वरूपा नारी अंतर्मन की पीड़ा पर सात पेंटिंग बनाई थी, जिस पर टीवी पर वर्ष 2011 में एक शो भी प्रसारित हुआ। वर्ष 2013 में उन्होंने भारतीय लघुचित्रों में देवियों का अंकन विषय पर चित्रकला विषय में पीएचडी की थी। डा.मिली बताती हैं कि देवियों के विषय में पीएचडी करने का मेरा मुख्य उद्देश्य यही है कि अपने बु्रश और रंग के द्वारा मैं समाज में नारी रूपी देवी की स्थिति में थोड़ा-बहुत सुधार ला सकूं और नारी रूपी देवी पर अत्याचार बंद हो सकें। उन्होंने बताया कि देवियों पर ही डीलिट (डॉक्टर आॅफ लिटरेचर) की डिग्री प्राप्त करना उनका ध्येय है।

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