दयावान

कुँवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

टॉलस्टाय की गिनती संसार के प्रसिद्ध और प्रमुख दार्शनिकों में होती है।  उनके समय में राजाओं और उनके कारिन्दों द्वारा जनमानस पर जुल्मसितम करना आम बात थी। टॉलस्यटाय ऐसी उत्पीड़न और अत्याचार की घटनाओं को सुनकर क्षुब्ध और व्यथित हो जाते थे।  शासक से मतभेद रखने वालों पर भी बर्बर अत्याचार किये जाते, यहाँ तक उनकी बस्तियों को जला देना आम बात थी। ऐसे कठिन समय टॉलस्यटाय ने अत्याचारों के विरुद्ध निर्भीकतापूर्वक लेख लिखकर मानवधर्म का आदर्श पेश किया।
   उन्होंने लिखा कि यदि मनुष्य में किंचित भी धर्म शेष है तो सबसे पहले वे प्रभू की उस वाणी पर अमल करें कि किसी की हत्या का अधिकार तुम्हें बिल्कुल नहीं है। दूसरों से तुम जिस व्यवहार की अपेक्षा करते हो, उनके साथ भी वैसा ही व्यवहार करें। जिसका प्रभु और धर्म में विश्वास है, उसे सबसे प्रेम करना चाहिए। प्रभु के नाम और उनकी कृपा से शासन करने वाले सभी शासक अत्याचार और अन्याय और अहंकार पूर्ण कार्यवाई करने से पहले एक बार दिल में यह विचार जरूर करें कि अत्याचारों का उन्हें भी एक दिन ईश्वर को जवाब और हिसाब देना ही होगा, इसलिये कभी पाप न करने का संकल्प लें।
राष्ट्रीय अध्यक्ष जय शिवा पटेल संघ

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