माँ सरस्वती की वन्दना

डॉ. राजेश पुरोहित, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

अंधेरों को मिटाकर माँ , उजाले भर देती है।
अज्ञानता को माँ  , पल भर में माँ हर लेती है।।
सुर लय ताल आरोह अवरोह स्वर दे देती है।
गीतों के खजाने से माँ गीत ग़ज़ल दे देती है।।
श्वेत कमलासनी माँ मन का तमस मिटा देती है।
माया मोह से सबको माँ छुटकारा दिला देती है।।
मझदार में डूबती नैया को माँ पार लगा देती है।
जीवन के सूने मरुस्थल में सुमन खिला देती है।।
भवानीमंडी, राजस्थान।

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