आरएनआई ने निरस्त किये 269,556 समाचार पत्रों के टाइटल, डीएवीपी ने 804 अखबारों को विज्ञापन सूची से निकाला, पुराने विज्ञापनों की जांच शुरू, अपात्र अखबारों से वसूली के निर्देश

शि.वा.ब्यूरो, नई दिल्ली। समाचार पत्रों के पंजीयक ने पिछले एक साल की जांच के बाद ढाई लाख से अधिक अखबारों का टाईटल निरस्त कर दिया है, साथ ही सैंकड़ों अखबारों को डीएवीपी की सूची से बाहर कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम को पुरानी सारी गड़बड़ी की जांच के निर्देश दिए हैं। इसमें अपात्र अखबारों और मैंगजीन को सरकारी विज्ञापन देने की शिकायतों की जांच भी शामिल है। गड़बड़ी पाए जाने पर रिकवरी और कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी हैं। इसके चलते मीडियाजगत में हड़कंप है।
मोदी सरकार के इशारे के बाद आरएनआई और डीएवीपी यानि विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय काफी सख्त हो चुके हैं। समाचार पत्र के संचालन में जरा भी नियमों को नजर अंदाज किया गया तो आरएनआई समाचार पत्र के टाईटल पर रोक लगाने को तत्पर है। डीएवीपी भी विज्ञापन देने पर प्रतिबंध लगा दे रहा है, देश के इतिहास में पहली बार हुआ है, जब लगभग 269556 समाचार पत्रों के टाइटल निरस्त कर दिए गए हैं। इसके साथ ही 804 अखबारों को डीएवीपी ने अपनी विज्ञापन सूची से बाहर निकाल दिया है। इस कदम से लघु और माध्यम समाचार पत्रों के संचालकों में हड़कम्प मच गया हुआ है।
ज्ञात हो कि विगत काफी समय से केंद्र सरकार ने समाचार पत्रों की धांधलियों को रोकने के लिए सख्ती की है। आरएनआई ने समाचार पत्रों के टाइटल की समीक्षा शुरू कर दी है। समीक्षा में समाचार पत्रों की विसंगतियां सामने आने पर प्रथम चरण में आरएनआई ने प्रिवेंशन ऑफ प्रापर यूज एक्ट 1950 के तहत देश के 269556 समाचार पत्रों के टाइटल निरस्त कर दिए हैं, इसमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र के 59703 अखबार व मैग्जीन हैं, इसके बाद उत्तर प्रदेश के 36822 अखबार व मैग्जीन हैं। इसके साथ ही बिहार के 4796, उत्तराखंड के 1860, गुजरात के 11970, हरियाणा के 5613, हिमाचल प्रदेश के 1055, छत्तीसगढ़ के 2249, झारखंड के 478, कर्नाटक के 23931, केरल के 15754, गोआ के 655, मध्य प्रदेश के 21371, मणिपुर के 790, मेघालय के 173, मिजोरम के 872, नागालैंड के 49, उड़ीसा के 7649, पंजाब के 7457, चंडीगढ़ के 1560, राजस्थान के 12591, सिक्किम के 108, तमिलनाडु के 16001, त्रिपुरा के 230, पश्चिम बंगाल के 16579, अरुणाचल प्रदेश के 52, असम के 1854, लक्षद्वीप के 6, दिल्ली के 3170 और पुडुचेरी के 523 टाइटिल निरस्त हुए हैं।

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