बढ़ता बिहार बनता बिहार, 7वीं बार फिर नीतीश सरकार

कूर्मि कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

नीतीश कुमार को 7वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बनने पर बहुत बहुत हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। बिहार में कूर्मि समाज की आबादी यूपी, छतीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश और कर्नाटक से भी कम है, फिर भी बिहार के कूर्मि समाज ने सन 1994 ई में पटना स्थित गांधी मैदान में सतीश कुमार के नेतृत्व में “कुर्मी चेतना जागरण महारैली” का सफल आयोजन किया गया था, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के कुर्मी समाज के सभी प्रमुख बड़े नेताओं ने भाग लिया था। बीबीसी ने इस महारैली को रिकाॅर्ड भीड़ के रूप में दर्ज की जो कुर्मी चेतना जागरण महारैली के पहले कभी नहीं दर्ज की गई थी। कहा जाता है कि इस महारैली में नीतीश नहीं जाना नहीं चाहते थे, पर जब उन्हें जानकारी मिली कि महारैली में रिकार्ड भीड़ है, तब नीतीश कुमार महारली में शामिल हुए और अपने संबोधन के साथ ही नीतीश कुमार उस महारैली के नायक बनकर उभरें थे। उसके पूर्व 1971-72 में नीतीश कुमार पटना इंजीनियरिंग काॅलेज छात्र संघ के अध्यक्ष हुआ करते थे, जब लालू प्रसाद यादव पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष का चुनाव लडा़ तो नीतीश ने इंजीनियरिंग काॅलेज के छात्र संघ के अध्यक्ष होने के नाते लालू प्रसाद यादव को पूरा सहयोग किया था। इसी बीच नीतीश कुमार को बतौर इलेक्ट्रीकल इंजीनियर की सरकारी नौकरी बिहार सरकार में लगी थी, पर नीतीश नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के बाद भी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की नौकरी जाॅइन नहीं कर पाये थे। शायद कुदरत को बिहार और देश को नीतीश कुमार जी के रूप में एक सादा जीवन उच्च विचार, ईमानदार, बेबाक और कर्तव्यनिष्ठ नेता बनाना मंजूर था। इसी बीच 1973 ई में नीतीश के वैद्य पिताजी ने पटना में पढ़ रही हाई स्कूल के हेडमास्टर की बेटी से उनका विवाह तय कर दिया, जबकि नीतीश कुमार जल्दी विवाह नहीं करना चाहते थे। परिजनों के सम्मान में उन्होंने हामी भर दी, पर जैसे ही नीतीश को पता चला कि लड़की के पिताजी ने दहेज के रूप में 27 हजार रुपये दिये हैं, वे बिफर गये और अपने पिताजी को कहा कि दहेज की राशि लड़की के पिताजी को वापस कर दे और शर्त रख दी कि विवाह बिना दिखावा और फिजूलखर्ची के कोर्ट में होगा। इस तरह मिसाल कायम करके क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गये। इस खबर के मिलते ही तत्कालीन मशहूर पत्रकार धर्मेन्द्र ने बिहार के बख्तियारपुर जिले के कल्याण बिगहा गाँव में पहुँच गये और नीतीश कुमार का साक्षात्कार प्रकाशित किया। जिसे बहुत सराहा गया। नीतीश छात्र जीवन से ही लालू की मदद करते रहे हैं। सन 1990 में जब बिहार के मुख्यमंत्री बनने की ऊहापोह स्थिति बनी तो ऐसे में नीतीश कुमार ने ही लालू प्रसाद यादव को बिहार के मुख्यमंत्री बनाने के लिए न केवल उनका नाम प्रस्तावित किया था, बल्कि पूरा जोर लगा दिया था। तब से ही नीतीश को बिहार का चाणक्य कहा जाता है। 1989 में केन्द्र की जनता दल की सरकार में नीतीश कुमार कृषि राज्यमंत्री बनाये गये थे, पर लालू बिहार के मुख्यमंत्री बनते ही मनमानी करने लगे और दल विरोधी तथा दल के वरिष्ठ नेताओं के विरोध में काम करने लगे।
      सन 1994 में नीतीश कुमार जाॅर्ज फर्णान्डिस के साथ मिलकर 4 सांसदों के साथ जनता दल से अलग हो गये। उसके पहले लालू राष्ट्रीय जनता दल बनाकर जनता दल को कमजोर कर चुके थे। जनता दल (जाॅर्ज) फिर समता पार्टी और बाद में जनता दल यूनाईटिड का सफर तय करते हुए 16 नवम्बर 2020 को संध्या 4.30 बजे नीतीश कुमार ने 7वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री की शपथ ली है।
जानकारों की माने तो नीतीश की गुण व कार्यशैली तो प्रधानमंत्री बनने की है, पर इसमें बाधा उनका छोटा दल के नेता होने की है। नीतीश कुमार एक मात्र ऐसे नेता हैं, जिनके ऊपर 41 वर्षों से राजनैतिक में रहने के बावजूद किसी तरह के दाग नहीं है। यह बहुत गर्व की बात है, क्योंकि नीतीश कुमार कूर्मि जाति के अवधिया कूर्मि शाखा से आते हैं। हालाकि भाजपा में अटल, आडवानी, मुरली युग के अंत और नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के साथ युग की शुरुआत के साथ नीतीश कुमार के भाजपा से संबंध पर बहुत फ़र्क पड़ा है, क्योंकि नरेंद्र मोदी की कार्यशैली नीतीश कुमार की कार्यशैली से मेल नहीं खाती हैं। वर्तमान भाजपा ने शिवसेना, तेलगू देशम पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, बीजू जनता दल, अकाली दल, नेशनल कांफ्रेन्स, जनता दल यूनाइटिड और अपना दल एस समेत अपने सभी सहयोगियों को पिछले कुछ वर्षों में धोखा दिया है, उन्होंने नीतीश कुमार के साथ भी दगा किया है। 2020 के बिहार विधान सभा में भी नीतीश को कमजोर करने के लिए भाजपा ने लोजपा संस्थापक रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान को आगे करके नीतीश को करीब 50 सिटों पर नुकसान किया है। वह सीटें कम (43 सीटें) आने पर भी नीतीश को मुख्यमंत्री भले बना रही है, पर परदे के पीछे से नीतीश को कमजोर भी कर रही है। इसकी झलक भाजपा के सुशील कुमार मोदी को उप मुख्यमंत्री नहीं बनाकर दो नये चेहरे – तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को उप मुख्यमंत्री बनाकर झलक दे दी है। आने वाले समय में नीतीश को साजिशों और परीक्षाओं से गुजरना होगा।
संस्थापक राष्ट्रीय समता महासंघ, सह राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा

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