सरहे झाखडी में प्रकट हुए थे नागलोक के अधिष्ठाता अनंत शेष श्री मूल गींह नाग सरही

डिम्पल राठौर, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

हिमाचल प्रदेश जिला मण्डी करसोग क्षेत्र के शेषावतारी गींह नाग की महिमा अपने आप मे अद्भुत रही है। यूँ तो सृष्टि के आरंभ से ही श्री गींह नाग जी महाराज चारों युगों में अधर्म पर धर्म की विजय में अपनी भूमिका निभाते आये है। भगवान शिव व विष्णु प्रिय श्री शेष नाग जी क्षीर सागर में वास करते हैं और नागजाति में श्रेष्ठ और भगवान शिव के वरदान स्वरूप शेष नाग को नाग कुल का राजा नियुक्ति किया गया है। शेष नाग सहस्त्र फनाधारी है। हजार मस्तकों में शेष नाग के प्रत्येक फन में अलग अलग शक्तियाँ अलग रूप अलग ही कला समाहित है। उसी प्रकार श्री गींह नाग जी भी अलौकिक शक्तियों, सत्ता और अनंत कला व विद्या के स्वामी हैं। भगवान विष्णु के साथ त्रेता में लक्ष्मण और द्वापर में बलराम अवतरण में गींह नाग महाराज ने अहम भूमिका निभाई थी। भगवान विष्णु व शिव के परम भक्त होने के कारण दिव्य शक्तियों व अनंत कला में निपुण होने पर शेष नाग को अनंत की उपाधि प्राप्त है, इसी कारण इन्हें भगवान भी माना जाता है ।
कालांतर में लोगों की भलाई और लोगों की रक्षा हेतु शेष नाग पिंडी रूप में इसी दिव्य स्थान में विराट विशाल रूप में प्रकट हुए थे। नाग देवता के साथ नागमाता शेष- शतशीर्षा और 64योगिनीयां, गणपति जी महाराज और महात्मा देव शंकर और अन्य बहुत से देवता पिडं रूप में प्रकट हुए थे। नाग देवता के पास दिव्य शक्तियों के रूप में 64 जोगणिया षोडश कला (अच्छरा) दुर्गा, रक्सीणपूत्र रकसेटा जी महाराज,काल – कोठरी बाण, समुद्री बाण, मशाणु महाराज, मूल जोगणु, बाडू काली, चतर्भुजा काली, भीमाकाली, भारथी वीर, हीरामौता, नबाका, लालरैबाण, धुम्री माता, झोर, जुंडलाबाण, कौत्राशौबाण, बिज़ी बाद्लिया तोगड़ा, घनशालीतोगडा, नागां, जहल द्वारपाल, क्षेत्रपाल जैसे अनेक शक्तिशाली बाण है । इन सभी गणों के श्री विग्रह मंदिर के इर्द गिर्द चारों और देवदार के वृक्षों के मध्य में स्थापित है। गींह नाग महाराज प्रत्येक क्षण भगवान शिव और विष्णु की तपस्या में लीन रहते हैं। श्री गींह नाग जी नागों में सात्विक व सत गुणों से परिपूर्ण है।
नाग देवता सरही में इस स्थान में बहुत ही शांत व  कड़े नियमों के साथ रहते हैं। क्रोधित होने पर श्री गींह नाग जी डेणा नाग का रूप धारित करते हैं सर्वनाश भी कर देते है इसलिए इन्हें हठी रूप का देवता भी माना जाता है। आधुनिकता के इस दौर में नाग देवता आज भी अपने क्षेत्र में प्राचीन परम्पराओं, रिति रिवाज , नियमों व प्रथाओं को आज भी शक्तिस्वरूप बरकरार रखे हुए हैं । नाग देवता के प्रति स्नेह प्रेम व भय से क्षेत्र के लोगों का अपने अराध्य पर अटूट विश्वास है। जीवन में कभी समय मिले तो श्री मूल गींह नाग सरही के इस दिव्य तपोस्थली के दर्शन जरूर करें।
करसोग मण्डी, हिमाचल प्रदेश

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