उ.प्र. राज्य उपभोक्ता परिषद अब बिजली दरों में कमी किए जाने की लड़ाई लड़ेगा

शि.वा.ब्यूरो, लखनऊ। बिजली दरों तथा स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं किए जाने के नियामक आयोग के फैसले के बाद उ.प्र. राज्य उपभोक्ता परिषद अब बिजली दरों में कमी किए जाने की लड़ाई लड़ेगा। इसके लिए परिषद द्वारा जल्द ही विद्युत नियामक आयोग में याचिका दायर की जाएगी। परिषद बिजली कंपनियों पर निकल रहे 19537 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं को दिलाए जाने का मुद्दा उठाएगा।
उ.प्र. विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा बताया है कि राज्य के तीन करोड़ उपभोक्ताओं की बिजली दरे कम कराने की कोशिशें अब तेज की जाएंगी। उन्होंने बताया कि 2019- 20 में जब प्रदेश की बिजली दरें घोषित की गई थीं, उस समय बिजली उपभोक्ताओं का उदय व ट्रूअप में वर्ष 2017-18 तक करीब 13337 करोड़ रुपये बिजली कम्पनियों पर निकल रहा था। अब 2020-21 में उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर 800 करोड़ रुपये निकला है। इसका जिक्र नियामक आयोग ने टैरिफ आदेश में भी किया है। ब्याज जोड़े जाने पर 13337 करोड़ रुपये इस समय करीब 18737 करोड़ हो जाएगा। वहीं 800 करोड़ और जोड़े जाने पर यह धनराशि 19537 करोड़ रुपये होगी। उपभोक्ताओं को यह धनराशि वापस होनी चाहिए। यदि बिजली कंपनियों को लगता है कि उनकी आर्थिक स्थिति एक साथ इसका लाभ उपभोक्ताओं को देने की नहीं हैं तो इसे तीन सालों में वापस करने की योजना दें। इन तीन सालों में हर साल बिजली दरों में 10 फीसदी की कमी कर इसका लाभ उपभोक्ताओं को दिया जा सकता है।

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