सबको बिलखता छोड़ दुनिया से विदा हो गया सकारात्मकता का पुंज हरदिल अजीज युवा उद्यमी, वकील, समाजसेवी व पत्रकार मनोज भाटिया


हवलेश कुमार पटेल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

हजारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा

ऐसा माना जाता है कि ये शेर अल्लामा इकबाल ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के लिए कहा था, लेकिन ऐसा लगता है, जैसे इस शेर को केवल मनोज भाटिया को ही ध्यान में रखकर रचा गया था। कहते हैं कि जब कोई जीव इस जगत् में आता है, तभी उसके जाने का समय भी तय हो जाता है और लोग समय के इस चक्र के आगे बेबस इस जहां से चले जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो व्यक्तित्व व कृतित्व के कारण समाज में ऐसा मुकाम हासिल कर लेते हैं, जिन्हें जमाना बरसो-बरस याद करता रहता है। ऐसी ही शख्शियत थे मनोज भाटिया।

श्री भाटिया के सहपाठी रहे नगर पालिका परिषद में कार्यरत संदीप की माने तो यदि मनोज भाटिया के बारे में लिखने की बात की जाये तो उनमें इतनी खूबियां थी, कि एक ग्रन्थ लिखा जा सकता है।

उनके निकट सम्पर्क में रहे भोला बताते हैं कि उनके परिवार में किसको क्या बीमारी है और उन्हें क्या दवाई देनी है, इस सब का लेखाजोखा मनोजभाटिया के पास रहता था, इतना ही बच्चों को कौन से स्कूल-कालेज में दाखिला दिलाना है, उन्हें क्या सब्जैक्ट दिलाना है और भविष्य में उन्हें क्या रोजगार कराना है, इस बारे में मनोज भाटिया ही निर्णय लेते थे।

श्री भाटिया के सहपाठी रहे सुशील पुण्ड़ीर की मानें तो मनोज भाटिया जैसे जिन्दादिल और दूसरों के लिए हमेशा तैयार रहने वाले इंसान मुश्किल ही मिलते हैं। लोग बरसो तक उनकी कमी को महसूस करते रहेंगे। उनके हमउम्र हनी ग्रोवर, रवि ग्रोवर का कहना है कि मनोज भाटिया उनके दोस्त ही नहीं, बल्कि पिता के समान थे। मनोज भाटिया के निकटस्थ डा.रविन्द्र सिंह के अनुसार मनोज भाटिया के जाने से जैसे उनका सबकुछ लुट गया है। उनकी कमी जीवनभर उन्हें सालती रहेगी।

आज स्थानीय हवेली बैंकटहाॅल में आयोजित युवा पत्रकार, उद्यमी व समाजसेवी मनोजभाटिया के निधन के बाद आयोजित उठाला कार्यक्रम में उमड़े जन सैलाब ने श्री भाटिया के जीवन की सार्थकता को सिद्ध कर दिया। वहां मौजूद ऐसी कोई आंख नहीं थी, जो मनोज भाटिया के जाने के गम में नम न हो। इससे पूर्व तहसील बार एसोसिएशन कल 12 नवम्बर को मनोज भाटिया के निधन पर शोक प्रस्ताव पारित करके कार्य से विरत रही थी। उनके निधन के शोक में करनाल में वरिष्ठ पत्रकार खुर्शीद आलम के निवास स्थान पर एक शोक सभा आयोजित की गई, जिसमें दिवंगत की आत्मा शांति के लिए प्रार्थना की गई। शोक सभा में खुर्शीद आलम, जीतन्द्र तुली, आशुतोष गौतम, पवन कुमार शर्मा, शैलेंद्र जैन, मुशर्रफ राणा, कदम सिंह व रमेश सैनी आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

झिंझाना में आयोजित शोक सभा में प्रेम चन्द वर्मा, तस्लीम आलम, रविन्द्र राणा, अमित गोयल, नरेन्द्र चिकारा, सजंय शर्मा, अमित कुमार शर्मा, नेत्रपाल आर्य व महेरबान कुरेशी आदि पत्रकारों ने मनोज भाटिया को अश्रुपूरित नेत्रों से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मनोज भाटिया के निधन पर मीरापुर में उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित शोक सभा में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शोकसभा में विनोद नागर, सुशील शर्मा, वासुदेव शर्मा, आफताब आलम, जोगेन्द्र चौधरी, विनय नागर, धर्मोद चौधरी, कोमल कुमार, जावेद जामिया, शुभम शर्मा पत्रकार मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

बता दें कि युवा उद्यमी, समाजसेवी व पत्रकार मनोज भाटिया कई धार्मिक, सामाजिक, व्यवासायिक व लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहे जाने वाले पत्रकार संगठनों से भी जुड़े थे। उन्हें फेफडों में संक्रमण के चलते दो दिन पूर्व मेरठ के सुभारती मेडिकल में भर्ती कराया गया था। वहां उपचार के दौरान अचानक उनका देहान्त हो गया था। उनके निधन की सूचना से हर व्यक्ति स्तब्ध रह गया था। कल उनका अन्तिम संस्कार हरिद्वार के कनखल स्थित दक्ष मन्दिर के समीप शमशान घाट में किया गया था।

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