ज्ञान का दीप

डॉ. राजेश पुरोहित, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

मर्यादा का पाठ पढ़ाने राम ह्रदय में आ जाओ।
सूने सूने अंतर्मन में ज्ञान का दीप जला जाओ।।
मन की अवध आज पुकारे चौदह बरस कैसे काटे।
वन उपवन की पीड़ा को हमें सुनाने आ जाओ।।
काम क्रोध लोभ मोह के रावण कुंभकर्ण कैसे मारे।
मेघनाथ को रण में कैसे धूल चटाई बता जाओ।।
आज अवध को सजाकर हम नैन बिछाए बैठे हैं।
प्रतीक्षा के प्रतिफल को श्रीराम बांटने आ जाओ।।
अंतर्मन के अंधियारे को  रोशन करने आ जाओ।
मेरे सूने आंगन को प्रभु शबरी समझकर आ जाओ।।
भवानीमंडी, राजस्थान

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