अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागी 63 देशों के मुख्य न्यायाधीशों, न्यायविदों  व कानूनविदों ने जारी किया लखनऊ घोषणा पत्र, नई विश्व व्यवस्था तक जारी रखेंगे प्रयास

शि.वा.ब्यूरो, लखनऊ। सिटी मोन्टेसरी स्कूल के तत्वावधान में ऑनलाइन आयोजित विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 21वें अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागी 63 देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, न्यायविद्, कानूनविद् व अन्य प्रख्यात हस्तियों  ने लखनऊ घोषणा पत्र के माध्यम से संकल्प व्यक्त किया है कि वे विश्व एकता, विश्व शान्ति एवं भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य हेतु नई विश्व व्यवस्था के गठन हेतु सतत् प्रयास करते रहेंगे।

विदित हो कि लगातार चार दिनों तक सम्पन्न हुए इस महासम्मेलन के अन्तर्गत विश्व की प्रख्यात हस्तियों, न्यायविदों व कानूनविदों की गहन परिचर्चा के निष्कर्ष स्वरूप लखनऊ घोषणा पत्र जारी किया गया। न्यायविदों ने संकल्प व्यक्त किया कि वे अपने देश में अपनी सरकार के सहयोग से इस मुहिम को आगे बढायेंगे, जिससे विश्व के सभी नागरिकों को नई विश्व व्यवस्था की सौगात मिल सके और प्रभावशाली विश्व व्यवस्था कायम हो सके। उक्त जानकारी सम्मेलन के संयोजक डा. जगदीश गाँधी ने दी है।

लखनऊ घोषणा पत्र के विस्तृत विवरण में मुख्य न्यायाधीशों, न्यायाधीशों व कानूनविदों ने कहा कि हम विश्व के मुख्य न्यायाधीश व न्यायाधीश भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 पर आधारित, ‘विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 21वें ऑनलाइन अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ में प्रतिभाग कर रहे हैं, आज पिछले सम्मेलनों में पारित संकल्पों पर दोबारा अपनी मुहर लगाते हुए तथा विश्व में कानून व न्यायिक प्रणाली के केन्द्रीयकरण की वास्तविकता को मानते हुए, संकल्प लेते हैं।

संकल्प

  1. संयुक्त राष्ट्र संघ से दृढतापूर्वक अनुरोध किया जाये

क.    कि संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर की समीक्षा तथा सुरक्षा परिषद में संशोधन की प्रक्रिया तेज की जाये,
ख.    कि सामूहिक नरसंहार के हथियारों को खत्म करने के प्रयासों में तेजी लाई जाये,
ग.    कि आतंकवाद, उग्रवाद एवं युद्धों की रोकथाम के लिए प्रयास किये जायें, तथा
घ.    एक अन्तर्राष्ट्रीय पर्यावरण कोर्ट की स्थापना की प्रभावकारिता पर विचार करे।

  1. विश्व के तमाम देशों के प्रमुखों व राष्ट्राध्यक्षों से अपील की जाए

क.    कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के निर्देशों के अनुरूप उसे लोकतान्त्रिक बनाने के उद्देश्य से उसका पुनरावलोकन किया जाए।
ख.    कि राष्ट्राध्यक्षों व सरकारी तंत्रों के प्रमुखों की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर विभिन्न वैश्विक समस्याओं पर विचार किया जाए और एक लोकतांत्रिक रूप से गठित विश्व संसद के लिए कार्य किया जाए जो एक प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय कानून की स्थापना करे।
ग.    कि ग्लोबल वार्मिंग को रोकने/कम करने हेतु तत्काल कदल उठाये जायें जैसा कि अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में आपसी समझौता हुआ है, एवं
घ.    कि महिलाओं की प्रगति सुनिश्चित करने हेतु सभी संभव उपाय किये जाएं ताकि उन्हें पुरूषों के समान मानवाधिकार एवं मौलिक स्वतन्त्रता की गारंटी हो।

  1. विश्व के न्यायालयों के सदस्यों से दृढतापूर्वक अनुरोध किया जाय

क.    कि व्यक्ति के सम्मान को बढावा दिया जाय जो कि सभी मूलभूत मानवाधिकारों तथा मौलिक स्वतंत्रता का आधार है।
ख.    कि राष्ट्रीय सरकारों को प्रेरित किया जाय कि वे अपने समस्त स्कूलों में नागरिक शिक्षा, शान्ति शिक्षा तथा अन्र्त-साँस्कृतिक समझ की शिक्षा देने की शुरूआत करे।
और यह भी संकल्प लेते हैं कि इस घोषणा पत्र को सभी देशों व सरकारों के प्रमुखों व मुख्य न्यायाधीशों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव तथा क्षेत्रीय संस्थाओं जैसे अफ्रीकन युनियन, यूरोपियम यूनियन, एसियान आदि के प्रमुखों को उनके विचारार्थ और यथा संभव कार्यान्वयन हेतु भेजा जाए।

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