एक शिक्षक के रूप मे बाल दिवस का महत्व 

अब्दुल कलीम खान दायरा,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

विद्यालय रूपी बगिया को सुसंस्कार वान बनाने का सबसे महत्वपूर्ण योगदान माली के रूप में एक शिक्षक का होता है। प्रत्येक माली का यही एकमात्र लक्ष्य होता है कि वह अपनी बगिया को पूर्णता हरा -भरा और महकाता हुआ देखे। इसके लिए वह दिन-रात ,यथा- शक्ति ,हर संभव  इसी उधेड़बुन में लगा रहता है कि उसकी बगिया में खिलने वाले नन्हे मुन्ने पौधों को किस प्रकार अच्छी खाद और पोषक तत्व प्रदान करे, जिससे वह अपने लक्ष्य में सफल हो सके ।
ठीक इसी प्रकार की परिस्थिति से प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के शिक्षकों को दो चार होना पड़ता है ।इसके लिए वह बाल मनोविज्ञान का सहारा लेते हैं। बाल मन की कोमल भावनाओं को प्रारंभिक स्तर पर उनकी तुतलाती  वाणी  और  एक कठोर व्यक्तित्व के रूप में शिक्षक की छवि के कारण बालकों की स्थिति शोचनीय बन जाती है।
 एक सफल शिक्षक अपने बालकों की मनः स्थिति को ठीक प्रकार से समझने की हर संभव प्रयास करता है और निरंतर वह अपने अनुभव के आधार पर उनकी आवश्यकता  की पूर्ति उपलब्ध समुचित संसाधनों के आधार पर करने  की कोशिश करता है। प्रत्येक बालक की मनः स्थिति और उसके आसपास का पर्यावरण भिन्न-भिन्न  होता है ।जिसके कारण एक शिक्षक विभिन्न परिस्थितियों का अनुभव करके अपने नन्हे-मुन्ने बालकों को परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाना सिखाता है और अपने अनुभव के आधार पर उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी विचलित ना होकर धैर्य के साथ कठिनाई का मुकाबला करना सिखाता है। शिक्षक वास्तव में समाज का आईना होता है, जो समाज के महत्वपूर्ण घटक बच्चों को समाज के विकास के लिए तैयार करता है।
 बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की परिकल्पना को साकार कर एक नवीन समाज की रूपरेखा तैयार करना ही शिक्षक का एकमात्र मूल उद्देश्य होता है और उसके लिए वह सजग होकर दिन रात प्रयासरत रहकर कार्य करता है। एक शिक्षक के लिए प्रत्येक दिन बाल दिवस ही होता है क्योंकि वह प्रतिदिन बालकों की विभिन्न समस्याओं को बाल मन के अनुसार समझता है और उनकी हर संभव समस्या का समाधान बाल हित को ध्यान में रखते हुए करने का प्रयास करता है। बालक वास्तव में बालक ही ठहरे, उनकी नादानियां उनकी शैतानियां और उनका बालमन की तरह जिद करना वास्तव में शिक्षक को अपने बचपन की याद तरो-ताजा करवा देता है और वही शिक्षक उन बच्चों में अपना बचपन तलाश करने का हर संभव प्रयास करता रहता है। जिससे शिक्षक के स्वास्थ्य और बालकों के मन पर बहुत अच्छा प्रभाव परिलक्षित होता है ।
 आज हम सब शिक्षक बाल दिवस के अवसर पर मिलकर यह अहद करें कि हम बच्चों में अपना बचपन याद करके उनको उनका शिक्षण कार्य करवा कर उनको सु संस्कारवान बनाकर एक नए समाज की परिकल्पना में अपनी पूर्णाहुति प्रदान करें।
शिक्षक राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सेवली, पंचायत समिति खंडेला जिला सीकर राजस्थान ।

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