भगवान बुद्ध चालीसा

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

पूर्णिमा को अवतरे,गौतम बुद्ध महान।
 राज पाठ को छोड़के, कीना जग कल्याण।।
जय जय गौतम बुद्ध नरेशा।
सब जग स्वामी सत्य विशेषा।।१
फैला जग में पाप अचारा।
रोग शोक भय हाहाकारा।।२
झूठ कपट अज्ञान पसारा।
सत्य धर्म जगत से हारा।।३
सुंदर समय शुभ घड़ी आई।
जनमें बुद्ध जगत सुखदाई।।४
संवत पांच सौ त्रैसठ ईशा।
प्रभु अवतार भयो तेइसा।।५
शुद्धोधन के घर अवतारे।
महमाया के आंखन तारे।।६
सात दिना में माता छोड़ा।
मौसी दूधा नाता जोड़ा।।७
ज्योतिष कहते दिव्यअनूपा।
राज पाठ दिखता नही भूपा।।८
यह सुन के राजा घबराये।
तुरत बाल को जगत छिपाये।।९
कुश्ती अश्वा तीर कमाना ।
सीखे सारे आयुध नाना।।१०
ग्रंथन से पढ़ ज्ञान कमाई।
अल्पकाल विद्या सब पाई।।११
बालपने से करुणा सागर।
ज्ञान बुद्धि बलगुण के आगर१२
देवत नामा भ्रात चचेरा।
जंगल करता हंस शिकारा।।१३
घायल हंसा आप बचाया।
हुआ विवाद अदालत आया।।१४
राजा ने जब न्याय सुनाया।
पंछी बुद्धा को दिलवाया।१५
सोलह वर्ष उम्र थी भाई।
तभी आपका ब्याह रचाई।१६
शाक्यकुल यशोधरा कन्या।
पायो सिद्धू हो गई धन्या।।१७
महलों में अब खुशियां छाई।
बजे नगाड़े मिली बधाई।।१८
सुंदर बेटा राहुल नामा।
पाये सदगुण नियम विधाना।।१९
भोगी  देखे  रोगी  देखें।
कष्ट झेलते बूढ़े देखे।।२०
मन में ऐसी करुणा जागी।
राज पाठ से भये विरागी।।२१
त्यागा सुत वित त्यागी नारी।
छोड़ी गृहस्थी माया सारी।२२
दुनिया के दुख मेंटनहारा।
कपिलवस्तु का राजकुमारा।२३
सत्य ज्ञान पुरुषारथ करता।
चिंता पीड़ा अरु दुख हरता।।२४
राज छोड़ जंगल को धाये।
नदी अनोमा सिर मुंडवाये।।२५
भूख प्यास सुख साधन छोड़ा।
मौन साधके आतम जोड़ा।२६
बहुत समय तक प्रभु तप कीना।
पाया आतम ज्ञान प्रवीणा।।२७
वैशख पूनम रात सुहानी।
ता दिन से गौतम भै ज्ञानी।।२८
सारनाथ श्रावस्ती सारा।
मगध राज को बुद्ध संवारा।।२९
प्रसेन उदयन बिंदी वारा।
तीनों बौद्ध मत स्वीकारा।३०
भूप अशोका बने महाना।
बुद्ध धरम को सब जग जाना।३१
कुशी नगर में भये ब्रह्मलीना ।
दे गये जग में पंथ नवीना।।३२
अष्टांग मारग आप बताये।
पंचशील के नियम सिखाये।।३३
त्रिपिटक तीन भाग कहाये।
पाली भाषा ग्रंथ रचाये।।३४
भृगु आनंद देव उपाली।
खेम भदरिका अरु किंबाली।।३५
बिंबि सारा रानी खेमा।
बुद्ध धरम के करती नेमा।।३६
चीन कोरिया लंक जपाना।
थाई बरमा बुद्ध समाना ।।३७
बोध गया मंदिर बनवाया।
महाबोधि का नाम धराया।।३८
जनम ज्ञान अरु प्रभु निर्वाणा।
तीनो दिवस पूर्णिमा आना।।३९
सुबह शाम जो ध्यान लगाते।
सुख शांति बल बुद्धि पाते।।४०
मौन तपस्या साधके, पंचशील गुण खान।
अहिंसा करुणा सत्यवली,कहत हैं कवि मसान।।
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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