चीनी मिलों का पेराई सत्र प्रारम्भ, जनपद में अवशेष गन्ना मूल्य भुगतान की स्थिति बेहतर

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। जिला गन्ना अधिकारी ने बताया है कि जनपद में 08 चीनी मिलें स्थापित है, जिसमें 7 (खतौली, तितावी, मन्सूरपुर, रोहाना, टिकौला, भैसाना एवं खाईखेडी) निजी क्षेत्र की तथा एक चीनी मिल मोरना सहकारी क्षेत्र की है। चीनी मिलों द्वारा गत पराई सत्र 2019-20 में कोराना महामारी के कारण लाॅक डाउन में निरन्तर सम्पूर्ण गन्ने की पेराई करते हुए 19 जून 2020 को पेराई सत्र का समापन किया गया। कृषक हित को दृष्टिगत रखते हुए किसानो के बेसिक कोटे केे अतिरिक्त लगभग 144 ला.कु. गन्ने का अतिरिक्त सट्टा करते हुए सम्पूर्ण गन्ने की पेराई की गई। जनपद की चीनी मिलों पर गत पेराई सत्र 2019-20 का कुल 3402.93 करोड रू. देय हुआ, जिसके सापेक्ष चीनी मिलों द्वारा दिनांक 31.08.2020 तक 2556.09 करोड रू. का भुगतान कर दिया गया तथा अंकन 846.84 करोड रू. अवशेष था। चीनी मिलों द्वारा माह सितम्बर 2020 में 250.58 करोड रू. एवं माह अक्टुबर 2020 में 128.95 करोड रू. तथा माह नवम्बर दिनांक 04.11.2020 तक 36.45 करोड रू. का भुगतान कर दिया गया है। इस प्रकार चीनी मिलों द्वारा कुल  2972.07 करेाड रू. का भुगतान किया गया है, जो कुल देय का 87.34 प्रतिशत है। चीनी मिलों द्वारा दीपावली तक 90 करोड रू. भुगतान और किया जायेगा। वर्तमान में अन्य जनपदों की अपेक्षा जनपद की चीनी मिलों द्वारा किया गया भुगतान बेहतर स्थिति में है।
जिला गन्ना अधिकारी ने बताया है कि वर्तमान पेराई सत्र 2020-21 का प्रारम्भ हो गया तथा जनपद की 6 चीनी मिलों द्वारा पेराई कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है। विगत पेराई सत्रों में किसानो की पेपर पर्ची गुम हो जाने अथवा किसी कारण से पर्ची न मिलने की दशा में कोविड-19 में शासन द्वारा उक्त समस्याओं के दृष्टिगत इस वर्ष किसानों को एसएमएस पर्ची दिये जाने की व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था में गन्ना समितियों पर आपूर्तिकर्ता किसानों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस पर्ची भेजी जा रही हैं। यदि किसी भी किसान भाई को एसएमएस पर्ची न प्राप्त हो तो विकल्प के रूप में वेबसाइट (caneup.in) तथा ई-गन्ना ऐप पर अपनी पर्ची देखकर अपने गन्ने की तौल करा सकते हैं।
यदि कोई किसान भाई अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदलना चाहता है तो वह स्वयं ई-गन्ना ऐप के माध्यम से अथवा सम्बन्धित गन्ना समिति में जाकर अपना मोबाइल नंबर परिवर्तित करा सकता हैं। इस व्यवस्था से किसानों को समितियों पर अथवा चीनी मिलों पर नही आना पडेगा बल्कि इस माध्यम से गन्ने की आपूर्ति करने में किसानो को आसानी होगी।

Related posts

Leave a Comment