कूर्मि समाज को जागरूक और जिम्मेदार बनाने के लिए अपनी भूमिका सुनिश्चित करें

कूर्मि कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी सामाचार पत्र।  

कहते है कि हमें वही मिलता है, जो हम दूसरों को देते हैं। सम्मान के बदले सम्मान और अपमान के बदले अपमान। वफादारी के बदले वफादारी और धोखा दे बदले धोखा मिलता है। न यह आयु ज्यादा दिन रहने वाली है और ना ही सुन्दरता, न जवानी और न पद, पावर और प्रतिष्ठा फिर घमंड/ अहंकार किस बात का ? जगत विजेता सिकन्दर भी मरते समय खाली हाथ मरा था। कंस, जरासंघ, समेत सभी अहंकारी राजाओं और महाराजाओं, नेताओं, राजनेताओं और बड़े-बड़े कभी स्टार रहने वाले व्यक्तियों की मौत भी वैसे ही आती है, जैसे एक गरीब और असहाय व्यक्ति की मौत आती है। बस समझ-समझ का फेर है। कोई व्यक्ति उच्च शिक्षा, कोई पद -पावर और प्रतिष्ठा तो कोई सुन्दरता तो कोई ताकत तो कोई धन को ही सब कुछ समझकर अहंकार में आकर गलतियों की सारी सीमाएं तोड़ डालते हैं, तो कोई अपने स्वार्थ को साधने के लिए जमीर तक को बेच देते हैं। अब भला ऐसे व्यक्तियोंत को किस श्रेणी में रखें जाएंगे जो  कूर्मि महासभा और कूर्मि समाज को ही बर्बाद करने पर तुला हुआ है ?
       सवाल उठता है ऐसे गलत काम करने वाले लोगों को मान सम्मान ,आदर -सत्कार और सहयोग देकर गलती हमारा समाज खुद ही करता है। अगर समय रहते ऐसे गलत काम करने वाले व्यक्तियों पर गलती स्वीकार करने और सुधारने के दबाब बाले जाये और वैसे व्यक्तियों के किसी भी तरह से सहयोग तथा समर्थन नहीं देकर बहिष्कार कर दिया जाए तो हमारे समाज और देश में किसी भी गलत कदम उठाने वाले को एक सबक मिल सकेगा। जब लोग कूर्मि महासभा के पदाधिकारी बनने पर भी काम नहीं करते तो आखिर  ऐसे लोगों को समाज क्यों पदों पर बर्दाश्त करें? फिर ऐसी स्थिति में आखिर वह कौन सी वजह है, जिसके कारण सर्वेश जी बिना महासभा और देश के कूर्मि समाज के विकास और मजबूती के लिए कोई काम किये बिना लगातार वर्षों से महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं? क्या यह महासभा और कूर्मि समाज के हितों के विरूद्ध काम नहीं है? क्या यह अतिक्रमण और जातीय सामाजिक महासभा को अतिक्रमण बनाकर रखने के अपराध नहीं है? क्या कूर्मि समाज के 126 वर्ष पुराने अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा को अतिक्रमण से निकालने के लिए देश के कूर्मि समाज के जागरूक और जिम्मेदार कूर्मि मित्रों की कोई जवाबदेही नहीं बनती है?
देश के कूर्मि समाज के जागरूक और जिम्मेदार कूर्मि मित्रों के द्वारा अब तक चुप रहने के कारण ही हमारे महासभा को कुछ कूर्मि समाज के अपने लोग ही निजी स्वार्थ को साधने के लिए खंडित -बिखंडित रखा दिया है। अपने निजी स्वार्थ को साधने के चक्कर में दो फाड़ करके देश के कूर्मि समाज को बांटकर आपस में जो कटुता फैलाने का दुस्साहस प्रारम्भ किया गया था, वह आज तक लगातार जारी है। आप लोग खुद ही बताएं क्या एक ही अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा, एक ही पंजियन संख्या 220/1984-85 के नाम पर देश में दो राष्ट्रीय अध्यक्ष, दो राष्ट्रीय महासचिव और दो राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति और फिर प्रदेश तथा जिले के दो-दो कार्यकारिणी समितियां सन 2008 से चलाये जा रहे हैं, क्या यह वैधानिक और सही है?
       अब कांरवा आगे बढ़ रहा है महासभा समेत अन्य कूर्मि संगठनों में कूड़े कचरे की सफाई अभी आने वाले कुछ वर्षों तक चलाकर इसे दुरूस्त की जाएगी और देश के कूर्मि समाज के ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ क्रांतिकारी साथियों को भी आगे बढा़कर जातीय, सामाजिक और राजनैतिक संगठनों में सेवा करने के मौका दिये जाएंगे। अब सारे कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ संवैधानिक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के तहत ही किये और स्वीकार किये जाएंगे, इसीलिए देश के सभी राज्यों के सभी कूर्मि संगठनों और सभी शाखाओं, उपजातियों से साग्रह निवेदन है कि आप लोग इस महान कार्य को आगे बढ़ाने के लिए अपनी भूमिका सुनिश्चित करें।
संस्थापक राष्ट्रीय समता महासंघ व सह राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा 

Related posts

Leave a Comment