वृद्धावस्था

कुंवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

एक व्यक्ति के चार बेटे और बहुऐं थी। जब घर का मुखिया पिता उम्र की अधिकता से वृद्ध और कार्य करने में लाचार हो गया तो उसके बेटों ने उसकी उपेक्षा करना शुरू दिया। चारों निर्लज्ज भाईयों ने विचार कर अपने असहाय पिता का चारपाई बिस्तर जानवरों के बाड़े में डाल दिया। वृद्ध पिता अपनी अपनी असमर्थता पर चुपचाप आँसू बहाता और पुरानी दिन याद करता कि पत्नी के आकस्मिक निधन के बावजूद उसने अपने बच्चों के लाड़प्यार और परवरिश में कभी कोई कमी नहीं आने दी, फिर भी उसके लाड़ले बेटे ना जाने उसके साथ ऐसा सलूक क्यों कर रहे हैं ? भूख से विकल होकर जब वह काँपते हाथों से बर्तन बजाता तब कहीं बहू बेटा बचा खुचा खाना उसके बर्तनों में डाल देते।  कुछ दिनों तक यह क्रम चलता रहा, उसके बेटों के बच्चे यह सब देखते और सोंचते कि यह कोई परम्परा होगी , जो आगे चलकर हमें भी निभानी होगी।
 एक दिन बच्चे बाड़े में गये तो देखा कि उनके दादा जी दयनीय अवस्था में एक पुरानी सी चारपाई पर पड़े दर्द से कराह रहें हैं। उन्होंने दादा जी से बातकर सारा मामला मालूम कर लिया। सब बच्चों ने मन ही मन निश्चय किया और वहाँ पड़े जूठे मिट्टी के बर्तन और फटे पुराने मैले कपड़े लाकर आदि लाकर अपने अपने कमरों में रख दिये।। बच्चों के माँ बापों ने जब यह देखा तो डाँटते हुए कहा-इन्हें यहाँ लाकर क्यों रखा। बच्चों ने निर्भीकता से जवाब दिया-आप लोगों के लिये। जो कुछ आप लोग कर रहें हैं, हमें भी एक दिन वही करना पड़ेगा। जब इप लोग बाबा जी की तरह बूढ़े हो जायेंगे तो हम आपको बाड़े में इन्हीं बर्तनों में खाना देंगें और पहनने को यही कपड़े। उसके लिये ही यह प्रबन्ध अभी से करना शुरू कर दिया है।
   बच्चों की बातें सुनकर चारों बेटे सन्न रह गये। वह तुरन्त बाड़े में गये और तुरन्त अपने पिता को घर मे ले आये। उनको नहला धुलाकर नये वस्त्र पहनाये और भोजन कराया तथा एक आरामदायक बिस्तर सोने के लिए दिया।  सारे बच्चे यह देखकर बहुत खुश हुए और वृद्ध भावुक हो बच्चों से लिपटकर प्यार करने लगे।
      यह हर व्यक्ति को सोच समझ लेना चाहिए कि उसकी डाली गई परम्परा का पालन ही अगली पीढ़ी करेगी, इसलिये भूले से भी बुरा बर्ताव माँबाप के साथ ना करें और माँ-बाप भी अपने अंतिम दिनों के लिए कुछ नगद सम्पत्ति वगैरा अपने पास जरूर रखें।
राष्ट्रीय अध्यक्ष जय शिवा पटेल संघ

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