लोकभाषा के संरक्षण को वेबिनार के माध्यम लगातार तीसरे दिन विद्वानों ने किया मंथन, कहा-लोकभाषा के संरक्षण को नई तकनीक अपनाये जाने की जरूरत

शि.वा.ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश मे पहाड़ी भाषा की गतिविधियो को बढ़ावा देने आज तीसरे दिन हिमाचल प्रदेश के अन्य चार जिलो ंशिमला, सोलन, सिरमौर तथा बिलासपुर के पहाड़ी बोली के विद्वानों से बेविनार के माध्यम से सम्बन्धित जिलों की बोलियों की स्थिति पर परिचर्चा की गई। कार्यक्रम के प्रारम्भ में विभाग की सहायक निदेशक (भाषा) कुसुम संघाईक ने विद्वानों का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कांगडा जिला के विद्वान डाॅ0 गौतम व्यथित ने की। शिमला से भूप रंजन तथा डाॅ0 ओपी शर्मा, सोलन से मदन हिमाचली तथा अमरदेव अंगीरस, सिरमौर से विद्यानंद सरैक तथा ओमप्रकाश राही, बिलासपुर से कुलदीप चंदेल तथा रामलाल पाठक ने परिचर्चा में भाग लिया। सभी विद्वानों ने परिचर्चा के दौरान अपने-अपने जिले की बोलियों की स्थितियों पर प्रकाश डाला तथा कहा कि ग्रामीण स्तर पर बोलियाॅ विलुप्त नहीं हो रही शहरों में युवा पीढ़ी को आधुनिक तकनीक के द्वारा बोलियों के प्रति आकर्षित करने की आवश्यकता है।

सिरमौर से विद्यानंद सरैक ने कहा कि महान विभूतियों द्वारा रचित साहित्य को लोकनाटय तथा नाटक के माध्यम से युवा पीढ़ी तक पहुॅचाया जा सकता है। भूप रंजन ने स्कूलों में विद्वानों को अपना व्यतव्य देने के लिए सरकारी स्तर पर अधिकारिक स्वीकृति देने की बात कही। बिलासपुर के कुलदीप चंदेल ने कहलूरी संस्कृति की जानकारी दी। उन्होने युवा पीढ़ी को अपनी लोकभाषा तथा लोककला से जुड़ने के लिए स्कूली स्तर पर नियमित रूप से पहाड़ी बोली में कार्यक्रम करवाये जाने का सुझाव दिया। कार्यक्रम के अध्यक्ष डाॅ0 गौतम व्यथित ने कहा कि लाहौल स्पिति, किन्नौर तथा पाॅगी की संस्कृति व साहित्य बहुत समृद्व है, जिसे प्रकाशित करवाने हेतु आवश्यक कदम उठाये जाने चाहिए। लोकभाषा को जीवंत बनाने के लिए डाॅ0 गौतम व्यथित ने कहा कि मीडिया तथा लोकनाटयों के द्वारा प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए, ताकि युवा पीढी तक लोकभाषा तथा लोककला का सम्प्रेषण हो सके। सभी विद्वानों ने लेखकों द्वारा लिखे जाने वाले पहाड़ी साहित्य को प्रकाशित करवाने हेतु विभाग तथा अकादमी को नई पत्रिका तथा पहाड़ी में साहित्य के प्रकाशन हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करने की बात कही। विभाग के निदेशक अनुपम कश्यप ने बताया कि विभाग द्वारा जिला तथा राज्य स्तर पर इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि हर जिले की क्षेत्रीय बोलियों को प्रोत्साहन दिया जा सके।

बता दें कि हिमाचल प्रदेश मे पहाड़ी भाषा की गतिविधियो को बढ़ावा देने का जिम्मा सम्भालते हुए हिमाचल के भाषा एवं संस्कृति विभाग ने गत वर्षो की तरह 1 नवम्बर को पहाड़ी दिवस का आयोजित करने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। भाषा एवं संस्कृति विभाग के सहायक निदेशक कुसुम संघाईक के अनुसार पहाड़ी भाषा को प्रोत्साहन देने हेतु विभाग गत दो वर्षों से विभाग द्वारा पहाड़ी सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है।

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