आशिक

आशुतोष, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

पल दो पल का साथ हमारा
पल दो पल की बाते हैं।।
भूल चुका अब सबकुछ
वो घुंधली धुंधली सी यादें हैं।।
आयी विरह की रात काली
वो मस्त मतवाली यादें हैं ।।
वो अलबेली बात का जादू
वो खिलखिलाती बातें हैं ।।
जैसे अल्हड़पन तेरा था
वैसी ही तेरी मुलाकातें है।।
बात है अपनी जहाँ की
वो सौगात की शामें है।।
वो शोहरत दौलत की
अपनी तो विरह की रातें हैं।।
खूब चला रूप का सिक्का
अब तो सूनी सूनी सांसे हैं।।
दिल परेशान हो चला अब
फिर भी हम तेरे आशिक हैं ।।
                                  पटना, बिहार 

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