जब हर जाओ

राजीव डोगरा ‘विमल’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

जीवन में कभी
थक जाओ हार जाओ,
तो चुपचाप बैठ जाना  ।
लोग बोलते हैं तो
बोलते देना,
लोग सोचते हैं तो
सोचते देना,
तुम खुद को
बेकार मत समझना।
तुम खुद को
खराब मत समझना।
जब जीवन की
परिस्थितियां बदलती है
तो बहुत से लोग
नसमझ माने लगते है हमें।
मगर तुम खुद को
समझदार ही माना
क्योंकि तुमने जीवन की
हर परिस्थिति से
लड़कर जीना सीख।

युवा कवि और लेखक कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

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