संत सिंगाजी चालीसा (शरद पूर्णिमा पर विशेष)

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

ग्राम खजूरी नर्मदा, सिंगाजी का आन।
गवली घर में अवतरे ,कहत हैं कवि मसान।।
जय सिंगाजी जय अविनाशी।
तू ही मथुरा  तू  ही काशी।।१
पंद्रह सौ छियोत्तर आई।
बैसाख सुदी ग्यारस भाई।।२
पुष्य नखत्तर दिन गुरुवारा।
ग्राम खजूरी में अवतारा।।३
भीमा गौरा के तुम पूता।
बहिना कृष्णा लिंबा भ्राता।। ४
ज्योतिष ने शुभ घड़ी बताया।
सिंगा नाम जगत में पाया।।५
संवत  पंचादस  इक्यासी ।
छोड़ खजूरी हरसुद वासी।।६
तीन सौ भैंसे साथ लिवाई ।
गवली जाति खरी कमाई।।७
बालपने में धूम मचाते।
सब सखा मिल हंसते गाते।।८
लंबी धोती चादर माथा।
पटा पावड़ी लकड़ी हाथा।।९
कान मूंदड़ी,कमर कटारी।
तीर कमाना बड़े खिलाड़ी।।९
दूध घी की नदी बहाई ।
छाछ गरीबों रोज लुटाई।।१०
संगिनी नाम जसोदा बाई।
सीधी सुंदर सरल कहाई।।११
चार पूत सब भये अनोखा।
कालू  भोलू  सन्दू  दोपा।।१२
आत्मज्ञान जब गुरु से पाया ।
छोड़ चाकरी ध्यान लगाया।।१३
गायन भैसन का रखवाला।
 पीवे  दूधा  रूप  निराला।।१४
पशुओं  का तू  चारनहारा।।
हरिया बंसी  राग पियारा।।१५
पंडित ओंकारेश्वर धाये।
जंगल में तू दरश दिखाये।।१६
पंडित ताना सुन रे ग्वाला।
गोबर दूधा  काम तिहारा।१७
दर्शन कर ले शिव के प्यारे।
जीवन  को तू व्यर्थ बिगारे।।१८
यह सुन के बाबाजी बोले।
मीठी वाणी आखर तौले।।१९
मैं तो हूं  पशु का रखवारा।
इनकी सेवा करम हमारा।।२०
भोले शंभू दीन दयाला।
करते हैं वे सबका पाला।।२१
ओंकारेश्वर में सिंगा देखा।
ऐसा अचरज कभी न लेखा।।२२
सिंगाजी ने किया प्रणामा।
भगतां बोले कैसे आना।।२३
वापिस वे सब घर को आते।
बाबा मिल गये गाय चराते।।२४
टूटा  गरब  हो गए पानी।
जब बाबा की लीला जानी।।२५
एक बार की बात सुनाई।
भैंसे सब मिल चोर चुराई।।२६
सुनकर रोंवे लोग लुगाई।
सिंगा भैंसे तुरत मंगाई।।२७
ग्यारह सौ पद आप बनाये।
सिर्फ ढाई सौ ही मिल पाये।।२८
ब्रह्मगीर के भजन सुहाये।
मनरंगी ने तुम्हें सुनाये।।२९
साखी बणावली उपदेशा।
आत्म ध्यान दृढ़ नरद शरेदा।।३०
बारह मासी बोध सुहाये।
सिंगाजी के नामा गाये।।३१
गांव गांव में भजन गवाई।
ऐसी गुरु से लगन लगाई।।३२
झांझ मृदंग हैं साज तुम्हारा।
गाते भजनां सिंगा प्यारा।।३३
सहज सरल कवि संत कहाई।
निर्मल मन जन जन सुखदाई।३४
गाये भैसे जब खो जाते।
सब मिल देवा मान चढ़ाते।।३५
सिंगा स्वामी पिपल्या वाला।
संत निमाड़ी जग रखवाला।।३६
भटके को तू राह बताता।
भूखे को भोजन करवाता।।३७
श्रावण शुक्ला नवमी आई।
समाधी बाबा ने लगाई।।३८
शरद पूर्णिमा मेला भारी।
दर्शन करते लाख हजारी।।३९
गौ के घृत की ज्योति जलाते।
श्रीफल चिरोंज प्रसाद चढ़ाते।।४०
सिंगाजी की परचरी, लेखक खेमा दास।
दलूदास भी लिख गये ,गुरु देव आभास।।
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

Related posts

Leave a Comment