अज्ञानी

कुंवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

एक समय की बात है,  किसी गाँव में एक वैद्य रहता था। उसने यस प्रचार करवा रखा था कि उसे अमरता का रहस्य पता है।  उसके इस झांसे में आकर तमाम भोले भाले धर्मान्ध लोग उससे अमर होने का राज़ जानने को आने लगे। चालाक वैद्य उन सभी लोगों से धन ले लेता और बदले में लोगों को उल्टी सीधी बातें समझाकर अपना उल्लू सीधा करता। और खुदा ना खास्ता उसका कोई अनुयायी मर जाता तो वह लोगों में यह प्रचार करता कि मरने वाले ने उसके नियमों का ठीक से पालन नहीं किया होगा, इसलिये वह अमरता हासिल नहीं कर पाया। वैद्य का धन्धा मूर्ख लोगों में बहुत बढ़िया चल रहा था। यह बात उस देश के राजा के कानों तक पहुँची तो राजा ने तुरन्त एक संदेशवाहक को वैद्य को लाने के लिए भेजा। कुछ कारणवश दूत को यात्रा में विलम्ब हो गया और जब वह वैद्य के घर पहुँचा ,तो पता चला कि वैद्य तो कुछ समय पहले मर गया। दूत डरते डरते वापस महल पहुँचा और राजा को यात्रा में विलम्ब और वैद्य के गुजरने की बात बतायी।
      राजा यह सुनकर बहुत क्रोधित हुआ और उसने दूत को मृत्युदण्ड देने का आदेश दिया।  एक ज्ञानी व्यक्ति को जब राजा के आदेश का पता चला तो वह तुरन्त राजा के दरबार में पहुँचा और समझाते हुए बोला, महराज ! यह सही है कि दूत ने वहाँ जाने में देरी की, लेकिन आपने भी उसे वहिँ भेजने की गलती की है। वैद्य की मौत से यह साब़ित होता है कि उसे अमरता के किसी रहस्य का पता ही नहीं था, अन्यथा खुद उसकी मौत नहीं होती। महराज रहस्य यही है कि अमरता का कोई रहस्य ही नहीं है। केवल अज्ञानी ही ऐसी बातों का भरोसा करते हैं। राजा को सब बात समझ में आ गई, उसने दूत को भी क्षमा कर दिया और मरने जीने की चिन्ता से मुक्त होकर शान्तचित्त जीवन व्यतीत करने लगा।
  आज भी कई बार पढे लिखे लोग तक चालाक लोगों के झूठे दावों पर यकीन कर बैठते हैं ,और अपना चैन,धन, घर बार लुटा बैठते हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष जय शिवा पटेल संघ

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