ओशो चालीसा

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

रजनिश से ओशो बने,करुणा ध्यान विचार।
दो जन्मों की साधना,दर्शन का भंडार।
ग्यारह दिसंबर बड़ सुखदाई।
उन्नीस सौ इकतिसा भाई।।1
सरस्वती घर बालक आये।
पिता बाबुदा सुन हरषाये।।2
तीन दिनों तक हॅंसा न रोया।
एक बूंद भी दूध न पोया।।3
ऐसा बच्चा जग ने देखा।
ज्योतिष पाया अद्भुत भेखा।।4
रेवा तट पर है ननिहारा।
कुचवाड़ा में जनम तिहारा।।5
चन्द्र मोहन जैन दिगंबर।
तोड़े तुमने सब आडंबर।।6
चमकती सूरत लंबी दाढ़ी।
तैराकी के बड़े खिलाड़ी ।।7
आंखों बरसे तेज तुम्हारा।
न्याय सत्य का पालनहारा।।8
ओशो नाम जगत से आया।
करुणा प्रेम बुद्ध की छाया।।9
गाडरवाड़ा बचपन बीता।
सभीजनों के दिल को जीता।।10
गर्रा घाट पे ध्यान लगाया।
मृत्युबोध का अनुभव पाया।।11
एम ए दर्शन शिक्षा सागर।
ढोंग धतूरे किये उजागर।।12
प्रेम भाव के दर्शन भाये।
सन सत्तावन कालेज आये।।13
प्रोफ़ेसर बन छात्र सिखाया।
नौ वर्षों तक खूब पढ़ाया।।14
छोड़ नौकरी जन उपदेशा।
बनी साख तब देश विदेशा।।15
पुरुषारथ भी चार बखानी।
ब्रह्म वान गृहस्थ सन्यासी।।16
गृहस्थी को संन्यास बनाया।
एक सौ बारह ध्यानसिखाया।।17
संभोग समाधि पुस्तक आई।
सारी  दुनिया  में चरचाई।।18
भला बुरा सब तुम्हें बताये।
पौथी  का तो  भेद  न पाये।।19
ग्रंथ अठारह गीता लेखी।
ऐसी विद्वत कहीं न देखी।।20
सब विषयों पर पैठ जमाई।
सारी दुनिया करे बड़ाई।21
जब रजनिश भगवान कहाये।
सारी दुनिया हंसी उड़ाये।।22
मानवता के तुम अधिकारी।
सांचदया अरु धरम विचारी।।23
हे जग स्वामी अंतर्यामी ।
ज्ञान का दीपक सबने मानी।।24
सभी धर्म का आदर करते।
ढोंगी लोभी तुमसे डरते।।25
तर्क  तुम्हारे  बड़े करारे।
छोड़े  बंधन  लफड़े  सारे ।।26
मंदिर मस्जिद भेद मिटाया।
मानवता का पथ दिखलाया।।27
अमरीका में पुरी बनाई।
रजनिश ओशो महिमा छाई।।28
आरेगन आश्रम बनाया।
पैसठ सहस एकड़ सजाया।।29
कुंडली ध्यान मेडीटेशन।
धरम के नित होते इनवेशन।।30
महंगी घड़ियां महंगी कारें।
ओशो कुटिया बहुता वारे।।31
थेरेपी भी बहुत चलाई।
मनो चिकित्सक का पद पाई।।32
तीन साल तक मौन हि साधा।
उसमें कभी न आई बाधा।।33
मां शीला षड्यंत्र रचाया।
ओशो पर आरोप लगाया।।34
ओशो दर्शन जग से न्यारा।
जीवन ध्यान केंद्र हमारा।।35
अमेरिका में अलख जगाया
राजनीति ने तुम्हें भगाया।36
पुणे आश्रम जग विख्याता।
ओशो ध्यान सदा बुलाता।37
ओशोधारा ओश विचाधारा।
ओशो टाइम पत्र तुम्हारा।।38
कभी न जन्में कभी न मरते।
ओशो जग को पावन करते।।39
मास जनवरी दिन उन्नीसा।
 सन नब्बे में पहुंचे ईशा।।40
चौतिस भाषा में रचे, ग्रंथ छै सौ पचास।
मानवता संदेश दिया, बुद्धि का विश्वास।।
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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