अब्राहिम लिंकन चालीसा

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

अब्राहिम लिंकन किया,मानवता का काम।
दास प्रथा उन्मूल कर,फिर कीना विश्राम।।
हे अब्राहिम लिंकन प्यारा।
मानवता हित जीवन वारा ।।1
थामस पिता नैनसी माता।
निर्धन जीवन रचा विधाता।।2
बेटी सारा पहले आई।
पीछे लिंकन जन्में भाई।।3
फरवरी बारह लगत सुहाई।
सन अट्ठारह नौ सुखदाई।।4
मातु नैनसी कष्ट उठाया।
तबजन सेवक लिंकन आया।5
मातु मेहनती अरु मृदुभाषी।
जीवन कुशला मन अभिलाषी।।6
अपने सुत को खूब पढ़ाती।
समय देख शाला भिजवाती।।7
परिजन सबमिल खेती करते।
जीवन यापन कठिन गुजरते।।8
आठ बरस में मां जग छोड़ा।
फिर भी लिंकन पढत कठोरा।।9
घर की दशा बिगड़ती देखी।
किया मजूरी किस्मत लेखी।।10
सांच ईमान श्रम अपनाया।
देश प्रेम भी मां से पाया।।11
पढ़ी जीवनी वाशिंगटन की।
उत्सह जागा करते मन की।।12
बाइबिल अमरिका इतिहासा।
वाशिंगटन का जीवन खासा।।13
टीले ऊपर मंच बनाते।
भाषण करते जन हरषाते।।14
लंबे  पूरे  हट्टे  कट्टे।
मार भगाते चोर निखट्टे।।15
मिसीसिपी में नाव चलाई।
निग्रों की सब व्यथा दिखाई।।16
इक युवती को बिकते देखा।
आंखों  पानी  सजती भेषा।।17
जब बाला का भाव बताया।
रुपया बोली सेठ लगाया।।18
घोड़ी जैसे चाबुक मारा।
रोम अंग का कांपा सारा।।19
पुष्ट शरीर  फेस दिखाया।
मनभर पूरा  पैसा पाया ।।20
देख  क्रूरता भये दुखारी।
भीतर हलचल हृदय विदारी।21
तब से दृढ़ विचार का आना।
दासप्रथा उन्मूल  कराना।।22
सन अट्ठारह सौ बत्तीसा।
धारा सभा चुनाव हताशा।।23
मेरी टोड से ब्याह रचाया।
एक नया फिर जीवन पाया।।24
राबट विलियम थामस बेकर।
चारो बेटे जीवन मेकर।।25
शाला में जब सभी पठाये।
शिक्षक को पाती भिजवाये।।26
बेटों के हो तुम निरमाता।
त्यागी जीवन भाग्य विधाता।।27
अक्फुट कोठ दुकान चलाया।
व्याकरण गणित यहिं से पाया।28
हर्न डोन का कर्ज उतारा।
खरी कमाई पैसा सारा।।29
फिर कानून की शिक्षा पाई।
विधि सलाह की सौगंध खाई।।30
करी वकालत लेजिस्लेटर।
सुलझाते वे उलझे मेटर।।31
दीन दुखी को न्याय दिलाते।
दुष्ट जनों को बाट लगाते।।32
बुद्धि कौशल तर्क सुझाई।
डगलस जज ने दई बधाई।।33
अमरीका संकट गहराया।
गृह युद्ध भी आप बचाया।।34
सन इकसठ में शुभदिन आया।
रीपब्लिक ने बहुमत पाया।।35
लिंकन प्रेसीडेंट बनाई।
सारे जग से मिली बधाई।।36
सन अट्ठारह पैसठ आई।
 अप्रेल पंद्रह बड़ दुखदाई।।37
विद्रोही  ने  गोली  मारी।
डूबा सूरज जग अंधियारी।।38
हे महमानव जन कल्याणी।
जन हितकारी तेरी वाणी ।।39
दासों को अधिकार दिलाया
सारे जग ने हर्ष जताया।40
न्याय सत्य का साथ ले, कर्मों का भगवान।
जीवन भर संघर्ष किया,कहते हैं कवि मसान।।

 

23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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