सार्थक, सकारात्मक, सटीक व सामयिक है सावित्री चौधरी का लघुकथा संग्रह परख

दिलीप भाटिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

101 लघुकथाएं सार्थक सकारात्मक सटीक सामयिक हैं। सावित्री दीदी की नवीनतम कृति पठनीय है। हमारे ही परिवेश की रचनाएं चिंतन मनन के लिए पाठक के मन में उतर जाने में सक्षम समर्थ हैं। भाषा सरल है। पुस्तक मन को बांधे रखती है व प्रारम्भ करने के बाद पूरी पढ़कर ही बंद  करनी होती है। कई रचनाओं में पाठक स्वयं को ही पाता है। पात्र समर्पण नहीं करते। संघर्ष करते हैं। कन्या भ्रूण हत्या के गलत आदेश का विरोध करती है व अन्याय का विरोध कर जीतती है। कन्या को जन्म देती है। ये सभी पात्र समाज को सन्देश देते हैं की अन्याय का विरोध कर कई जीवन बचाएं जा सकते हैं। कुछ रचनाओं में दहेज के विरोध के स्वर भी दूल्हे के पिता को शर्मिंदा करते हैं। समाज में सकारात्मक बदलाव धीरे-धीरे ही आता है। लेखिका के पात्र दहेज के विरूद्ध बोल कर एक सुखद संदेश देते है। इस पुस्तक को पढ़कर कई लड़कियां दहेज की बलि देने से बच सकती हैं।

इसी प्रकार इन लघुकथाओं में समाज की कई समस्याओं का सकारात्मक समाधान है। अंधविश्वास पाखण्ड रिश्वत बेईमानी जुआ नशा नए ज़माने की घटिया सोच बेटे की अंध चाह कथनी करनी में अंतर ट्यूशन का रोग शिक्षण संस्थानों में अनुपस्थिति को उपस्थिति में बदलने की धांधली इत्यादि कई बुराइयों को इन रचनाओं में स्पष्ट रूप से उजागर कर लेखिका ने साहसिक कदम उठाया है। निश्चय ही इस पुस्तक को पढ़कर कुछ एक व्यक्तियों का भी ह्रदय परिवर्तन हो सके तो लेखिका का रचना कर्म सार्थक होगा। पर्यावरण प्रदूषण बलात्कार शिक्षा का गिरता स्तर वृद्धाश्रम क्रेच सोशल साइट्स के दुरुपयोग मदिरा सेवन इत्यादि समस्याओं पर हम पाठक लेखिका की अगली पुस्तक में कलम चलाने की अपेक्षा रखते हैं। इस उत्कृष्ट संकलन के लिए दिलीप भाई का दिल से सावित्री दीदी की सशक्त कलम को नमन एवम् साधुवाद। प्रणाम। मूल्यांकन तो समीक्षक एवं संपादक तथा सम्मान प्रदान करने वाली संस्थाएं करेंगी ही। अगली पुस्तक की प्रतीक्षा रहेगी ही।

सेवानिवृत्त परमाणु वैज्ञानिक अधिकारी रावतभाटा 238 बालाजी नगर रावतभाटा 323307 राजस्थान।

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