जल की बर्बादी से बचें

आशुतोष, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

तमाम तरह के प्रचार-प्रसार और जानकारियों के वावजूद पेयजल जल की बर्बादी बदस्तूर जारी है। इसी को कम करने के उद्देश्य से सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथाॅरिटी ने अब इसको दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाने का फैसला किया है। इसके तहत कोई संस्था या व्यक्ति भू जल स्त्रोत या पीने वाले पानी की बर्बादी करते पकड़ा जाता है तो उस संस्था अथवा व्यक्ति पर दडात्मक कार्रवाई होगी।
सीजीडब्ल्यूए ने स्पष्ट कहा है कि नागरिक ईकाय राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में पानी से जुड़े समस्या पर काम करती है, जिन्हें जल वोर्ड निगम, वाटर वर्क्स डिपार्टमेट अथवा नगर निगम,  नगर पालिका विकास प्राधिकरण ही सुनिश्चित करेगी कि उनके क्षेत्र के भू जल  की बर्बादी पर वे कैसे कम करें? हमारे देश का बडा हिस्सा आज भीषण जल संकट से जूझ रहा है, जबकि कई जगह जल की बडे पैमाने पर बर्बादी होती है। जल हमारे दैनिक जीवन का आधार है। लगातार गिरते भू जल स्तर से पूरा विश्व आज परेशान है। ऐसे में सेंट्रल वाॅटर ऑथरिटी का यह निर्णय सराहणीय और स्वागत योग्य है। बर्शते यह जमीन पर और सुचारु रूप से कार्यान्वित हो।
जल के बिना जीवन की कल्पना नही की जा सकती, इस बात को सभी जानते है, लेकिन फिर भी बर्बादी होती है । विज्ञापन और तमाम कोशिशें भी जल की बर्बादी को कम नही कर पायी, मजबूरन दंडात्मक परिधि में लाया गया। यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है कि जल की कितनी बचत सभी निकाइयाँ मिलकर करती है, लेकिन इतना तो स्पष्ट है कि जल अथाॅरिटी बोर्ड ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए है, जिसका असर होना लाजिमी है।
पटना, बिहार

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