टेसू राजा

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

टेसू राजा अड़ा-पड़ा,
खाता रहता खड़ा-खड़ा।

दिल्ली घूँमा, मुंबई घूँमा,
घूँमा सारा कलकत्ता।
मिला न सरकारी भत्ता।।

लौट आया अपने गाँव,
ढूँढ रहा घर-घर काम।
जेब खाली बिना दाम।।

टेसू राजा अड़ा-पड़ा।
खाता रहता खड़ा-खड़ा।।

दही-बड़े का काम चलाया,
रुपया-पैसा खूब कमाया।
टेसू राजा ने नाम बनाया।।

ब्याह करने का मन बनाया,
झेंजी को संदेशा भिजवाया।
झेंजी रानी से ब्याह रचाया।।

टेसू राजा बन गया दूल्हा।
फूँक रहा है अब वो चूल्हा।।

ग्राम रिहावली, डाक तारौली गुर्जर, फतेहाबाद, आगरा 

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